Weekly Vrat Tyohar 14 To 20 November 2022: काल भैरव जयंती, उत्पन्ना एकादशी सहित इस सप्ताह पड़ रहे हैं ये पर्व
Weekly Vrat Tyohar 14 To 20 November 2022 नवंबर माह के तीसरे सप्ताह की शुरुआत हो चुकी है। इस सप्ताह काल भैरव जयंती उत्पन्ना एकादशी के साथ-साथ कई शुभ व्रत त्योहार पड़ रहे हैं। जानिए इस सप्ताह पड़ने वाले सभी व्रत त्योहारों के बारे में

नई दिल्ली, Weekly Vrat Tyohar 14 To 20 November 2022: मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि के साथ नए सप्ताह की शुरुआत हो रही है। हिन्दू धर्म में इस सप्ताह का काफी अधिक महत्व है। इस सप्ताह काल भैरव जयंती, उत्पन्ना एकादशी के साथ-साथ वृश्चिक संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। जानिए नवंबर माह के तीसरे सप्ताह के सभी व्रत त्योहारों के बारे में।
नवंबर 2022 के तीसरे सप्ताह के व्रत त्योहार
16 नवंबर 2022, मंगलवार- काल भैरव जयंती, वृश्चिक संक्रांति
काल भैरव जयंती
पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र अवतार बाबा काल भैरव को समर्पित है। माना जाता है कि इस दिन बाबा भैरव की विधिवत पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। काल भैरव भगवान का पूजन रात्रि में करने का विधान है।
वृश्चिक संक्रांति
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर साल 12 संक्रांति पड़ती हैं। जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। इसी तरह हर मास में राशि परिवर्तन होता है। इसी राशि परिवर्तन को संक्रांति नाम से जानते हैं। मार्गशीर्ष मास के 16 नवंबर को भी सूर्य देव तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए इस संक्रांति को वृश्चिक संक्रांति के नाम से जाना जाएगा। इस दिन स्नान-दान करने का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य की विधिवत पूजा, अर्घ्य देने के साथ पाठ करने से सभी कामनाएं पूर्ण हो जाती है। इसके साथ ही रोग-दोष और भय से छुटकारा मिल जाता है।
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20 नवंबर 2022, रविवार- उत्पन्ना एकादशी
पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने और व्रत रखने से सभी कामनाएं पूरी हो जाती है और हर पापों से मुक्ति मिल जाती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु के शरीर से एक देवी की उत्पत्ति हुई थी जिन्होंने मुर नामक राक्षस का वध किया था। तब भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर देवी को उत्पन्ना नाम दिया था।
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