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Vaman Jayanti 2019: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को वामन द्वादशी या वामन जयंती कहा जाता है, जो इस वर्ष 10 सितंबर दिन मंगलवार को है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा होती है। इस दिन सभी वैष्णव संप्रदाय मत के लोग व्रत रखते हैं और पूजा पाठ करते हैं। भगवान विष्णु ने असुर राजा बलि के भय से मुक्ति के लिए सतयुग में वामन अवतार लिया था।

वामन जयंती व्रत एवं पूजा विधि/Vaman Jayanti Vrat and Puja Vidhi

व्रती इस दिन सुबह उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होते हैं और स्नान के बाद व्रत का संकल्प करते हैं। अभिजीत मुहूर्त में भगवान वामन की पूजा-अर्चना की जाती है।

पूजा के बाद चावल, दही और चीनी के साथ वेद पाठी ब्राह्मण को दान कर दें। फिर शाम में भी भगवान वामन की पूजा अर्चना करें। पूजा के दौरान व्रत कथा सुनना आवश्यक होता है। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं फलाहार करें। अगले दिन सुबह पूजा पाठ के बाद दान आदि कर पारण करें।

वामन अवतार की कथा/Vaman Avtar Katha

भगवान विष्णु ने सतयुग में अपना पांचवा अवतार वामन का लिया था। भगवान वामन ॠषि कश्यप तथा उनकी पत्नी अदिति के पुत्र थे। भागवत कथा के अनुसार, असुर राजा बली ने इन्द्र का देवलोक हड़प लिया था। इंद्र को देवलोक पर अधिकार दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया।

भगवान वामन एक बौने ब्राह्मण के वेश में विरोचन के पुत्र तथा प्रहलाद के पौत्र बली के पास गए। उन्होंने बली से अपने रहने के लिए 3 पग भूमि मांगी। असुरों के गुरू शुक्राचार्य ने बली को चेताया कि वह ऐसा न करे। लेकिन बली ने भगवान वामन को 3 पग भूति देने का वचन दे दिया।

इसके बाद भगवान वामन ने अपना विशाल स्वरूप धारण कर लिया, पहले पग में पूरा भूलोक (पृथ्वी) और दूसरे में देवलोक नाप लिया। तीसरे कदम के लिए कोई भूमि नहीं बची, तो बली ने तीसरे पग के लिए अपना सिर सामने कर दिया।

भगवान वामन बली की वचनबद्धता से प्रसन्न हुए, उन्होंने उसे पाताल लोक देने का निश्चय किया। उन्होंने तीसरा पग बली के सिर पर रखा, जिससे वह पाताल लोक में पहुंच गए। इस प्रकार भगवान वामन ने देवताओं को उनका देवलोक वापस दिलाया और बलि के भय से मुक्ति प्रदान की।

 

Posted By: kartikey.tiwari

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