हनुमान जी के ये 3 गुण बना देंगे हर काम को सफल, सुंदरकांड की चौपाइयों से समझें इनका गहरा अर्थ
सुंदरकांड में वर्णित हनुमान जी के तीन गुणों को अपनाकर व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है। ये गुण ...और पढ़ें

जीवन में जरूर अपनाएं हनुमान जी के विशेष गुण (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
लक्ष्य प्राप्ति तक विश्राम न करने का गुण।
संकट में बुद्धि का प्रयोग करना सिखाते हैं।
उच्च पद पर भी विनम्रता बनाए रखने की सीख।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। तुलसीदास जी के द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का पांचवा अध्याय सुंदरकांड है। इसका विधिपूर्वक पाठ करने का अधिक महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन में आने वाले बड़े से बड़े सभी संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही मानसिक तनाव और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
सुंदरकांड के पाठ में हनुमान जी की महिमा का वर्णन किया गया है। साथ ही इसमें जीवन को सफल और सुखी बनाने के कई गहरे रहस्यों के बारे में बताया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुंदरकांड से हनुमान जी के जीवन के गुणों के बारे में पता चलता है। ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी के इन गुणों को जीवन में अपनाने से व्यक्ति को सफलता प्राप्त होती है और खूब तरक्की होती है।
आइए इस आर्टिकल में आपको सुंदरकांड की कुछ चौपाइयों के बारे में बताते हैं, जिनसे बजरंगबली के विशेष गुणों के बारे में पता चलता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि बजरंगबली के किन गुणों को अपनाना फलदायी साबित होता है।
''राम काज कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम''
सुंदरकांड के अनुसार, जब हनुमान जी माता सीता की खोज में समुद्र लांघ रहे होते हैं, तो मार्ग में मैनाक पर्वत उनसे विश्राम करने का आग्रह करता है, लेकिन वे मैनाक पर्वत की बात को नहीं मानते हैं और सीता की खोज में आगे बढ़ जाते हैं। हनुमान जी के इस गुण से यह सीख मिलती है कि जब तक व्यक्ति को अपना लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता, तब तक उसे रुकना नहीं चाहिए।
''सत जोजन तेहिं आनन कीन्हा। अति लघु रूप पवनसुत लीन्हा''
जब हनुमान जी समुद्र पार कर रहे थे, तब हनुमान जी को खाने के लिए सुरसा ने अपना मुंह बड़ा कर लिया था। ऐसे में हनुमान जी ने उसका सामना करने के लिए अपनी बुद्धि का प्रयोग किया था। प्रभु के इस गुण से यह सीख मिलती है कि व्यक्ति को जीवन में सदैव अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना जरूरी नहीं होता। संकट के दौरान अपनी बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए।
''राम दूत मैं मातु जानकी। सत्य सपथ करुनानिधान की॥''
जब हनुमान जी माता सीता की खोज में अशोक वाटिका पहुंचते हैं, तो बजरंगबली ने माता सीता के सामने स्वयं को राम जी का दूत बताया और श्री राम द्वारा दी गई अंगूठी उन्हें सौंपी। हनुमान जी के इस गुण से यह सीख मिलती है कि जीवन में चाहे कितना ही बड़ा पद मिल जाए, व्यक्ति को सदैव विनम्र और जमीन से जुड़ा रहना चाहिए।
यह भी पढ़ें- क्या महिलाएं कर सकती हैं सुंदरकांड का पाठ? यहां पढ़ें शुभ दिन और जरूरी सावधानियां
यह भी पढ़ें- सुंदरकांड का पाठ करते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां? रूठ सकते हैं हनुमान जी
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
