अशोक वाटिका में मां सीता ने नहीं किया था अन्न-जल ग्रहण, फिर कैसे बचे प्राण? पढ़ें प्रेरक प्रसंग
माता सीता ने रावण की कैद में अशोक वाटिका में बिना अन्न-जल ग्रहण किए लंबे समय तक जीवन कैसे व्यतीत ...और पढ़ें
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लंका में माता सीता ने नहीं छुआ रावण का अन्न-जल (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि धर्म और सत्य की जीवंत गाथा है। इस धार्मिक ग्रंथ का बेहद प्रेरणादायक प्रसंग है माता सीता का रावण के द्वारा अपहरण कर अशोक वाटिका में बिताया गया समय। सोने की लंका और महाशक्तिशाली रावण की कैद में आने के बाद भी माता सीता (Mata Sita) ने दृढ़ता से उसका विरोध किया।
माता सीता के संकल्प और पतिव्रता धर्म की वजह से ही लंका में रहने के बाद भी उन्होंने वहां का अन्न-जल ग्रहण नहीं किया। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि अशोक वाटिका में इतने लंबे समय तक रहने के बाद माता सीता कैसे जीवित रहीं, तो चलिए रामायण के इस प्रसंग के बारे में आपको बताते हैं।
माता सीता को अशोक वाटिका में बनाकर रखा बंदी
लंकापति रावण ने जिस जगह पर माता सीता को रखा था, उस जगह को अशोक वाटिका के नाम से जाना जाता था। इससे पहले रावण माता सीता को महल लेकर गया था। वहां माता सीता ने रावण की सभी चीजों को छूने से इनकार कर दिया। इसके बाद रावण ने माता सीता को अशोक वाटिका में बंदी बनाकर रखा।
अशोक वाटिका में माता सीता ने अशोक के पेड़ के नीचे लंबा समय बिताया। वह हमेशा भगवान श्रीराम के ध्यान में लीन रहती थीं। रावण ने माता सीता को डराने के लिए अशोक वाटिका के पास क्रूर राक्षसियों का पहरा लगा दिया था।
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(AI Generated Image)
अशोक वाटिका में रह कर माता सीता ने अन्न-जल त्याग का त्याग किया, तो ऐसे में ब्रह्मा जी बेहद चिंतित हुए। इसलिए उन्होंने स्वर्ग के राजा देवराज इंद्र को अशोक वाटिका भेजा। वहां पर माता सीता को देवराज इंद्र ने अपने बारे में बताया। उन्होंने माता सीता को स्वर्ग से लाई गई एक दिव्य खीर दी।
उन्होंने बताया कि यह खीर एक अमृत समान है। इसको खाने के बाद आपको भूख और प्यास नहीं लगेगी। इसके बाद माता सीता ने खीर को खाया, जिसके बाद उन्हें अशोक वाटिका में कभी भूख और प्यास नहीं लगी। इस प्रसंग का वर्णन वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में मिलता है। इसके अलावा अरण्य कांड में भी प्रसंग का वर्णन देखने को मिलता है।
अशोक वाटिका में हनुमान जी का आगमन
इसी वाटिका में अशोक पेड़ के नीचे माता सीता और हनुमान जी की पहली बार मुलाकात हुई। इस दौरान हनुमान जी ने माता सीता को भगवान श्रीराम की अंगूठी दी थी।
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