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क्या महिलाएं कर सकती हैं सुंदरकांड का पाठ? यहां पढ़ें शुभ दिन और जरूरी सावधानियां

Published: Sat, 26 Sep 2026 01:15 PM (IST)

हिंदू धर्म के अनुसार, महिलाएं भी सुंदरकांड का पाठ कर सकती हैं क्योंकि भक्ति में कोई लिंग भेद नहीं होता। ...और पढ़ें

सुंदरकांड पाठ के नियम (Picture Credit: AI Generated)

सुंदरकांड पाठ के नियम (Picture Credit: AI Generated)

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म और श्रीरामचरितमानस में सुंदरकांड का विशेष महत्व है। सुंदरकांड में भगवान श्रीराम के सबसे बड़े भक्त हनुमान जी की विजय, शक्ति और बुद्धि का वर्णन किया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधिपूर्वक सुंदरकांड का पाठ करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और हनुमान जी की कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

ऐसा माना जाता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से घर में उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। साथ ही भूत-प्रेत और भय से छुटकारा मिलता है। इस पाठ को करते समय कई बातों का ध्यान रखना चाहिए, तभी पाठ का पूर्ण फल प्राप्त होता है। क्या आप जानते हैं कि महिलाएं सुंदरकांड का पाठ कर सकती हैं? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।

क्या हैं नियम?

शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं द्वारा सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है। भक्ति के मार्ग में स्त्री-पुरुष का कोई भेदभाव नहीं होता।

सुंदरकांड पाठ करने के लाभ

धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधिपूर्वक सुंदरकांड का पाठ करने से घर में सुख-शांति का आगमन होता है और हनुमान जी की कृपा से जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं। साथ ही मानसिक तनाव दूर होता है और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। इसके अलावा यह पाठ मंगल, शनि और राहु-केतु जैसे ग्रह-दोषों को शांत करने में फलदायी साबित होता है।

किस दिन करें सुंदरकांड का पाठ?

वैसे तो सप्ताह के किसी भी दिन सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है, लेकिन मंगलवार और शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करना अधिक शुभ माना जाता है।

किस तिथि पर न करें सुंदरकांड का पाठ?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या तिथि पर सुंदरकांड का पाठ करने से बचना चाहिए। इस दिन इसका पाठ करना शुभ नहीं माना जाता है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • सुंदरकांड का पाठ करने से पहले स्नान कर साफ कपड़े धारण करें।
  • पाठ के दौरान किसी के बारे में गलत न सोचें और किसी से वाद-विवाद न करें।
  • जिस जगह पर बैठकर पाठ कर रहे हैं, उस स्थान की विशेष सफाई करें।
  • भूलकर भी काले रंग के कपड़े धारण न करें, क्योंकि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
  • पाठ का समापन होने के बाद आरती करें और मंत्रों का जप करें।
  • हनुमान जी को बूंदी के लड्डू और फल का भोग लगाएं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।