नाग पंचमी की पूजा में क्यों पढ़ी जाती है नाग देवता की कथा, पढ़ें इसका धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा
नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा के साथ उनकी कथा सुनने का विशेष महत्व है। यह कथाएं नागों के ...और पढ़ें

नाग देवता की कथा । (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा और कथा का महत्व।
राजा जन्मेजय और आस्तिक मुनि की पौराणिक कथा।
भगवान श्रीकृष्ण और कालिया नाग की प्रसिद्ध कथा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नाग पंचमी हिंदू धर्म में नाग देवता की पूजा के लिए विशेष पर्व माना जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की भी पूजा की जाती है, उनका व्रत रखा जाता है। पूजा के दौरान नाग देवता की कथा सुनने की परंपरा कई जगहों पर प्रचलित है। धार्मिक मान्यता है कि कथा सुनने से नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही सांप के भय से मुक्ति भी मिलती है। लेकिन इस दिन कौन सी कथा पढ़नी चाहिए आइए जानते हैं।
नाग देवता की कथा सुनने का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यताओं में नागों को भगवान शिव के आभूषण के रूप में सम्मान दिया जाता है। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए की जाती है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष और राहु-केतु से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है।
राजा जन्मेजय और आस्तिक मुनि की कथा
नाग पंचमी से जुड़ी प्रमुख पौराणिक कथाओं में राजा जन्मेजय और आस्तिक मुनि की कथा बताई जाती है। मान्यता के अनुसार राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डसने से हुई थी। इसके बाद उनके पुत्र राजा जन्मेजय ने बदला लेने के लिए सर्पसत्र यज्ञ का आयोजन किया।
यज्ञ में बड़ी संख्या में सांप आहुति के लिए यज्ञ कुंड की ओर खिंचे चले जा रहे थे। इससे नाग जाति के विनाश का संकट पैदा हो गया। तभी आस्तिक मुनि वहां पहुंचे और राजा जन्मेजय से यज्ञ रोकने का अनुरोध किया। उनकी बात मानकर राजा ने यज्ञ रोक दिया और नागों की रक्षा हुई।
मान्यता है कि यह घटना श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन हुई थी। इसी वजह से नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा और कथा सुनने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है।
श्रीकृष्ण और कालिया नाग की कथा
नाग पंचमी से जुड़ी दूसरी प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीकृष्ण और कालिया नाग की है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यमुना नदी में कालिया नाग के कारण आसपास के लोग परेशान थे। उसके विष के कारण नदी का जल भी प्रभावित हो गया था।
भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना में जाकर कालिया नाग का सामना किया और उसे पराजित किया। कालिया नाग ने अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी। इसके बाद श्रीकृष्ण ने उसे जीवनदान दिया और वहां से चले जाने का आदेश दिया।
अत: इस दिन कथा सुनना, पूजा करना और भगवान शिव का स्मरण करना भक्तों के लिए श्रद्धा और आस्था का विषय है। साथ ही यह पर्व प्रकृति और जीवों के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है।
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