नाग पंचमी पर शिव और सिद्ध योग का अद्भुत संगम, जानिए कैसे सफल होंगे आपके सारे बिगड़े काम?
17 अगस्त को नाग पंचमी पर शिव, रवि, सिद्ध और मंगला गौरी व्रत जैसे 4 दुर्लभ शुभ योग बन रहे ...और पढ़ें
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नाग पंचमी पर कौन से बन रहे शुभ योग? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 17 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने का विधान है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर नाग देव की साधना करने से कालसर्प दोष दूर होता है और नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है। एस्ट्रोपत्री के श्री चंद्रेश शर्मा बताते हैं कि नाग पंचमी का पर्व तिथि और नक्षत्रों के अद्भुत तालमेल के कारण आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत शक्तिशाली बन जाता है।
इस दिन ग्रहों की विशेष स्थितियों के कारण कई ऐसे दुर्लभ शुभ योग बनते हैं, जो पूजा और मंत्र सिद्धि के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं।दुर्लभ शुभ योगों की उपस्थिति में की गई नाग पंचमी की पूजा और साधना साधक को कष्टों से मुक्त कर मनोवांछित परिणाम प्रदान करती है।
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(Picture Credit- AI Generated)
नाग पंचमी के मुख्य शुभ योग
1. शिव योग: नाग पंचमी के दिन अक्सर 'शिव योग' का निर्माण होता है। यह योग साधना, मंत्र जाप और रुद्राभिषेक के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस योग में की गई भगवान शिव और नाग देव की पूजा से जीवन के सभी कष्ट समाप्त होते हैं और कार्य सिद्ध होते हैं।
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2. रवि योग: यदि इस दिन रवि योग बनता है, तो यह सूर्य देव की ऊर्जा से परिपूर्ण होता है। रवि योग में किए गए सभी प्रकार के दोष-निवारण के उपाय, विशेष रूप से कालसर्प दोष पूजा, बहुत जल्दी परिणाम देते हैं और अमंगलकारी शक्तियों का नाश करते हैं।
3. सिद्ध योग व हस्त/चित्रा नक्षत्र: नाग पंचमी पर नक्षत्रों के शुभ संयोग से 'सिद्ध योग' का निर्माण होता है। इस योग में कोई भी नया कार्य शुरू करना, प्रॉपर्टी या आभूषण खरीदना बेहद लाभदायक होता है।
4. मंगला गौरी व्रत का संयोग: जब नाग पंचमी सावन के मंगलवार को पड़ती है, तो इस दिन 'मंगला गौरी व्रत' का पावन संयोग भी बनता है। यह संयोग विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं के लिए मनचाहा वर पाने का दुर्लभ अवसर होता है।
पूजन का फल
इन शुभ योगों की उपस्थिति में यदि पूरे विधि-विधान से शिव जी का जल और दूध से अभिषेक किया जाए, तो कुंडली के बड़े से बड़े पितृ दोष और ग्रह दोष शांत हो जाते हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
