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    Shardiya Navratri 2022: जानें आखिर कौन-कौन से हैं मां दुर्गा के नौ अवतार, साथ ही जानिए उनका महत्व

    By Shivani SinghEdited By:
    Updated: Fri, 23 Sep 2022 08:45 AM (IST)

    Shardiya Navratri 2022 शारदीय नवरात्र के दौना मां दुर्गा के अलग-अलग रुपों की पूजा की जाती है। ये नौ रुप अलग-अलग सिद्धियां देते हैं। इन नौ अवतारों में मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री का अवतार शामिल है।

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    Shardiya Navratri 2022: जानें आखिर कौन-कौन से हैं मां दुर्गा के नौ अवतार, साथ ही जानिए उनका महत्व

    नई दिल्ली, Shardiya Navratri 2022: इस साल शारदीय नवरात्र 26 सितंबर से आरंभ हो रही है जो 4 अक्टूबर को नवमी तिथि के समाप्त होगी। इस साल की शारदीय नवरात्र काफी खास है। क्योंकि इस साल सोमवार को शुरू होने के कारण मां दुर्गा हाथी में सवार होकर आ रही हैं। जो अधिक वर्षा, खुशहाली, सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं दूसरी ओर इस बार पूरे नौ दिन नवरात्र पड़ रही है। इस साल मां दुर्गा के पूरे नौ रूपों की पूजा विधिवत तरीके से की जाएगी। जानिए मां दुर्गा के नौ रूपों के बारे में और उनका क्या है महत्व।

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    मां शैलपुत्री

    मां दुर्गा का पहले अवतार का नाम मां शैलपुत्री हैं। पहले दिन कलश स्थापना के साथ इनकी पूजा भी की जाती है। मां शैलपुत्री ने पर्वतराज हिमालय के घर पर कन्या के रूप में जन्म ली थीं। इसी कारण इन्हें इस नाम से पुकारा जाता है।

    मां ब्रह्मचारिणी

    मां दुर्गा के दूसरे अवतार का नाम ब्रह्मचारिणी है। नवरात्र के दूसरे दिन इनकी पूजा की जाती है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ है, जो ब्रह्मा के द्वारा बताए गए आचरण पर चले।

    मां चंद्रघंटा

    मां दुर्गा की तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा है। नवरात्र के तीसरे दिन इनकी पूजा होती है। माता के माथे का आकार घंटा की तरह होने के कारण इसलिए इसे चंद्रघंटा कहा गया है।

    मां कूष्मांडा

    मां दुर्गा का चौथा स्वरूप मां कूष्मांडा हैं। कूष्मांडा का अर्थ कुम्हड़ा है। मां ने पूरे ब्रह्मांड को उत्पन्न करने की क्षमता है, इसलिए इनका नाम कूष्मांडा पड़ा।

    मां स्कंदमा

    मां दुर्गा का पांचवां अवतार मां स्कंदमाता हैं। स्कंदमाता का अर्थ है स्कंद कुमार की माता से। स्कंद कुमार भगवान कार्तिकेय का दूसरा नाम है। इसी कारण वह स्कंदमाता के गोद में बैठे हुए दिखाई देते हैं।

    मां कात्यायनी

    मां दुर्गा का छठा अवतार मां कात्यायनी हैं। कात्यायिनी ऋषि कात्यायन की पुत्री हैं। कात्यायन ऋषि ने मां दुर्गा की बहुत तपस्या की थी और उन्हें प्रसन्न करके ऋषि ने वरदान में मांग लिया कि देवी दुर्गा उनके घर पुत्री के रुप में जन्म लें। इस कारण इनका नाम ये पड़ा।

    मां कालरात्रि

    मां दुर्गा का सातवां स्वरूप मां कालरात्रि हैं। नवरात्र के सातवें दिन इनकी पूजा की जातकी है। आलौकिक शक्तियों, तंत्र सिद्धि, मंत्र सिद्धि के लिए इन देवी की उपासना की जाती है।

    मां महागौरी

    मां दुर्गा का आठवां अवतार मां महागौरी हैं। नवरात्र के आठवें दिन यानी दुर्गाष्टमी के दिन इनकी पूजा की जाती है। पार्वती का सबसे उत्कृष्ट स्वरूप है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया तो उनका शरीर काला पड़ गया था। तब वह महागौरी कहलाई।

    मां सिद्धिदात्री

    मां दुर्गा का नौवां अवतार मां सिद्धिदात्री हैं। मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है। लेकिन मां हमेशा शुभ फल देने वाली मानी जाती हैं। इसलिए इन्हें शुभड्करी भी कहा जाता है।

    डिस्क्लेमर

    'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।''