Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Puja Path Tips: पूजा के दौरान इस दिशा में रखें अपना मुख, प्राप्त होगा कई गुना फल

    By Suman SainiEdited By: Suman Saini
    Updated: Fri, 17 Nov 2023 01:57 PM (IST)

    Puja Path Tips प्रत्येक धर्म का अपने-अपने ईश्वर की आराधना करने के एक विशेष तरीका होता है। हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ द्वारा ईश्वर का आभार प्रकट किया जाता है। हिंदू धर्म में सुबह-शाम अपने आराध्य की पूजा-अर्चना करने का विधान है। पूजा-पाठ के दौरान कई तरह के नियमों का भी ध्यान रखा जाता है। इस दौरान दिशा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    Hero Image
    Puja Path Tips: पूजा के दौरान इस दिशा में रखें अपना मुख।

    नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Puja Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में दिशाओं का विशेष महत्व है। इसके अनुसार यदि प्रत्येक वस्तु या कार्य के लिए दिशा का ध्यान रखा जाए तो यह लाभकारी सिद्ध होता है। ऐसे में यदि आप पूजा-पाठ के दौरान दिशाओं का ध्यान रखते हैं तो इससे आपको पूजा-पाठ का कई गुना अधिक फल प्राप्त हो सकता है। आइए जानते हैं कि पूजा करते समय किस दिशा में मुख करके बैठना चाहिए।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    ये दिशा है सबसे बेहतर

    वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा के दौरान आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। क्योंकि वास्तु के अनुसार यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार मानी गई है। ऐसे में यदि आप इस दिशा में मुख करके पूजा-पाठ करते हैं, तो इससे आपको कई गुना फल प्राप्त होता है। इसके अलावा पूर्व दिशा में मुख करके पूजा करना भी शुभ माना जाता है।  

    इस तरह करें मां लक्ष्मी का आराधना

    हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन की देवी माना गया है। ऐसे में यदि आप उत्तर दिशा में मुख करके मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं तो इससे कई हद तक आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। इसके साथ ही आप उत्तर दिशा में मुख करके मां लक्ष्मी की मूर्ति के सामने स्फटिक कि माला से मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप कर सकते हैं।  

    यह भी पढ़ें - Chhath Puja 2023: नहाय खाय से होती है छठ महापर्व की शुरुआत, जानिए इसका महत्व और नियम

    घर के मंदिर में इन नियमों का रखें ध्यान

    घर का मंदिर बनवाते समय भी दिशा का ध्यान जरूर रखना चाहिए। ऐसे में यदि आपके पूजा स्थल का द्वार पूर्व में होगा तो आपको विशेष लाभ मिल सकता है। वहीं, मंदिर के लिए एक ऐसे स्थान का चयन करें जहां सूर्य की किरणें और ताजी हवा आती हो। अगर आप इन नियमों का ध्यान रखते हैं तो इससे आप वास्तु दोष से बच सकते हैं।

    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'