Mantra Jaap: मंत्रोच्चारण के समय इन बातों का रखें ध्यान, मिलेगा पूरा लाभ
Mantra Jaap मंत्रोच्चारण करने से न केवल भगवान की दया दृष्टि आपके ऊपर बनी रहती है बल्कि इसके द्वारा मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। मंत्र का सीधा-सा अर्थ है मन को एक तंत्र में लाना। जब मन एक मंत्र के अधीन हो जाता है तब वह सिद्ध होने लगता है। शास्त्रों में भी मंत्रोच्चारण के ढेर सारे लाभ बताए गए हैं।

नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Mantra Jaap: हिंदू धर्म में पूजा पाठ करने के कई नियम बताए गए हैं। ईश्वर की आराधना करना उनकी कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम तरीका माना जाता है। इसके साथ शास्त्रों में पूजा-पाठ को लेकर कई नियम बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती है। आइए जानते हैं कि मंत्रोच्चारण के समय किन बातों का ध्यान रखा जाना जरूरी है।
क्या है मंत्र उच्चारण के लाभ
मंत्रोच्चारण ईश्वर की आराधना करने और मन को शांति दिलाने का सर्वोत्तम उपाय है। इसकी मदद से आप अपनी चेतना को ईश्वर से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। साथ ही इससे मानसिक व शारीरिक शांति का अनुभव होता है। मंत्रोच्चारण ईश्वर से जुड़ने का एक बेहतर तरीका है। इसके द्वारा मन को केंद्रित करने में भी आसानी होती है।
मंत्र तीन प्रकार के होते हैं-
उपांशु जप - यह जाप मानसिक और वाचिक मंत्र जाप का मिश्रण होता है।
वाचिक मंत्र जाप - इसमें साधक जोर-जोर से मंत्र जाप करता है।
मानसिक जाप- इसमें साधक मंत्रों का उच्चारण मुख से नहीं, बल्कि मन से करता है।
किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
मंत्र उच्चारण के समय कुछ नियमों का ध्यान रखा जाना जरूरी है तभी इनका पूरा फल प्राप्त होता है। किसी शांत जगह पर बैठकर शुद्ध वातावरण में मंत्रोच्चारण करना बहुत ही लाभदायक होता है। मंत्रोच्चारण हमेशा जमीन पर बैठकर करना चाहिए। अपने नीचे का आसन जरूर बिछा लें। हमेशा ध्यान रखें कि आसन पर कभी भी पैर नहीं लगाना चाहिए। मंत्र का जाप करते समय शुद्धता का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है। इसलिए हमेशा दैनिक क्रिया से निवृत्त होकर और नहा धोकर, कपड़े पहनने के बाद ही मंत्रों का जाप शुरू करें।
कैसी होनी चाहिए माला
मंत्रों का जाप करते समय माला का इस्तेमाल करना बहुत ही अच्छा माना जाता है माला का इस्तेमाल करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम किस देव की पूजा कर रहे हैं तुलसी की माला को सबसे उत्तम माना गया है लेकिन विशेष रूप से इष्ट का ध्यान में रखकर माला का चयन किया जाना चाहिए जैसे कि अगर आप भगवान शिव के मंत्रों का उच्चारण कर रहे हैं तो इसके लिए रुद्राक्ष की माला ले नहीं देवी लक्ष्मी के लिए कमलगट्टे की माला का उपयोग करना बेहतर समझा जाता है
किस दिशा में हो मुख
समय के अनुसार ही आपके बैठने की स्थिति होनी चाहिए। अगर आप सुबह-सुबह मंत्रों का जाप कर रहे हैं तो इस समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। वहीं अगर आप शाम के समय मंत्र का जाप कर रहे हैं तो ऐसे में आप का मुख्य पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
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