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    Mangala Gauri Vrat 2023: आज है श्रावण अधिकमास का चौथा मंगला गौरी व्रत, जानें उद्यापन विधि

    By Suman SainiEdited By: Suman Saini
    Updated: Tue, 08 Aug 2023 01:15 PM (IST)

    Mangala Gauri Vrat 2023 सावन माह में मंगलवार के दिन पड़ने वाले मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत मुख्य तौर पर माता पार्वती को समर्पित है। सावन अधिक मास का चौथा मंगला गौरी व्रत आज यानी 8 अगस्त के दिन रखा जाएगा है। सावन माह में कुल 9 मंगला गौरी व्रत रखें जाएंगे। आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत के उद्यापन की विधि।

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    Mangala Gauri Vrat 2023 मंगला गौरी व्रत उद्यापन विधि।

    नई दिल्ली, अध्यात्म। Mangala Gauri Vrat 2023: मंगला गौरी का व्रत श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को विवाहित स्त्रियों और अविवाहित कन्याओं द्वारा किया जाता है। इस बार अधिक मास के चलते सावन माह में 9 मंगला गौरी व्रत रखें जाएंगे। इस व्रत को पूरे विधि विधान के साथ करने से माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती साथ ही सुख-शांति बनी रहती है।

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    मंगला गौरी व्रत का महत्व (Mangla Gauri Vrat Importance)

    मंगला गौरी व्रत करने से सुहानिन महिलाओं को माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत को करने से पति की लंबी आयु और संतान सुख की प्राप्ति होती है। अविवाहित युवतियां द्वारा भी इस व्रत को अच्छे वर की प्राप्ति के लिए और विवाह में आने वाली बाधा को दूर करने के लिए किया जाता है। इस व्रत को करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    क्या है उद्यापन की विधि (Mangla Gauri Vrat udyapan vidhi)

    किसी भी व्रत की समाप्ति से पहले विधिपूर्वक उद्यापन करना जरूरी माना जाता है। ऐसे में अपने मंगला गौरी के व्रत पूर्ण करने के बाद आखरी मंगलवार को किसी पंडित या पुरोहित के सानिध्य में इस व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

    साथ ही सोलह सुहागन स्त्रियों को भोजन कराकर इस व्रत की समाप्ति करनी चाहिए। प्रत्येक मंगलावर की तरह ही पूजा करें और आखरी मंगलवार को पूरे परिवार के साथ हवन करें। पूर्णाहुति में पूरे परिवार व सगे-संबंधियों को शामिल कर अंत में आरती करें। इस तरह मंगला गौरी व्रत का उद्यापन किया जाता है।

    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    विधिपूर्वक किसी कार्य या व्रत की समाप्ति के बाद किया जाने वाला धार्मिक कार्य जैसे हवन, पूजन और भोजन आदि को उद्यापन कहा जाता है।