Kushotpatini Amavasya 2020: आज है कुशोत्पाटिनी अमावस्या, पढ़ें क्या है मुहूर्त एवं महत्व
Kushotpatini Amavasya 2020 आज 18 अगस्त यानी मंगलवार को कुशोत्पाटिनी अमावस्या है। यह भाद्रपद कृष्ण अमावस्या के पूर्वान्ह में मानी जाती है।
Kushotpatini Amavasya 2020: आज 18 अगस्त यानी मंगलवार को कुशोत्पाटिनी अमावस्या है। यह भाद्रपद कृष्ण अमावस्या के पूर्वान्ह में मानी जाती है। ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया, मान्यता है कि धार्मिक कार्यों, श्राद्ध कर्म आदि में इस्तेमाल की जाने वाली घास यदि इस दिन एकत्रित की जाए तो वह वर्ष भर तक पुण्य फलदायी होती है। बिना कुशा के की गई हर पूजा निष्फल मानी जाती है। ऐसे में चाहें कोई भी पूजा क्यों न हो कुशा का होना बेहद आवश्यक होता है। इस दिन तोड़ी गई कोई भी कुशा वर्ष भर पवित्र रहती हैं।
कुशोत्पाटिनी अमावस्या का मुहूर्त:
कुशोत्पाटिनी अमावस्या मंगलवार यानी 18 अगस्त को दिन में 9:28 मिनट से लगकर बुधवार 19 अगस्त को सुबह 8:03 बजे तक रहेगी। यदि पूर्वाह्न में दो दिन अमावस्या हो तो पहले दिन मनानी चाहिए। अतः मंगलवार 18 अगस्त को दिन 9:28 मिनट के बाद ही कुशोत्पाटिनी अमावस्या मनाई जाएगी। शास्त्रों में कहा गया है-
पूजाकाले सर्वदैव कुशहस्तो भवेच्छुचि:।
कुशेन रहिता पूजा विफला कथिता मया॥
किसी भी पूजन में इसलिए ही ब्राह्मण, यजमान कोअनामिका उंगली में कुश की बनी पवित्री पहनाते हैं। शास्त्र में 10 प्रकार का कुशों का वर्णन है। इनमें जो मिल सके, उसी को ग्रहण करें।
कुशा: काशा यवा दूर्वा उशीराश्च सकुन्दका:।
गोधूमा ब्राह्मयो मौञ्जा दश दर्भा: सबल्वजा:।।
दस प्रकार का कुश बतलाया है। इनमें जो मिले उसी ग्रहण कर लें। जिस कुशा का मूल सुतीक्ष्ण हो, अग्रभाग कटा न हो और हरा हो, वह ही देव और पितृ दोनों कार्यों के लिए योग्य माना जाता है। इसके लिए अमावस्या को दर्भस्थल में जाएं। फिर पूर्व या उत्तर मुख बैठे। कुश उखाड़ने के पूर्व प्रार्थना करें-
कुशाग्रे वसते रुद्र: कुश मध्ये तु केशव:।
कुशमूले वसेद् ब्रह्मा कुशान् मे देहि मेदिनी।।
'विरञ्चिना सहोत्पन्न परमेष्ठिन्निसर्गज।
नुद सर्वाणि पापानि दर्भ स्वस्तिकरो भव।।
ऊँ हूँ फट् मंत्र का उच्चारण करते कुशा दाहिने हाथ से उखाड़े। पूजन में इस कुश का प्रयोग वर्ष पर्यन्त विहित होता है।
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