Kalashtami Vrat 2022 Kartik Month: कार्तिक मास में कालाष्टमी व्रत कब? जानें पूजा मुहूर्त, मंत्र और विधि
Kalashtami Vrat 2022 भगवान शिव के भैरव अवतार को सबसे शक्तिशाली माना जाता है। इसलिए कालाष्टमी के दिन इनकी पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उनके सभी कार्य सफल होते हैं। जानिए किस दिन रखा जाएगा कालाष्टमी व्रत?
नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क | Kalashtami Vrat 2022 Kartik Month: हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन कालाष्टमी व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के शक्तिशाली भैरव स्वरूप की पूजा विधि-विधान से की जाती है। शास्त्रों में भैरव देवता के तीन स्वरूप बताए गए हैं। यह तीन स्वरूप हैं- काल भैरव, बटुक भैरव और रूरू भैरव। कालाष्टमी व्रत काल भैरव देवता को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और उसके जीवन में खुशियां आती हैं। आइए जानते हैं कालाष्टमी व्रत 2022 तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
कालाष्टमी तिथि और मुहूर्त (Kalashtami Vrat 2022 Puja Muhurat)
हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 17 अक्टूबर को सुबह 09:29 प्रारम्भ होगी और इसका समापन अगले दिन 18 अक्टूबर मंगलवार को सुबह 11:57 पर होगा। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए व्रत 17 अक्टूबर के दिन रखा जाएगा।
कालाष्टमी व्रत पूजा विधि और मंत्र (Kalashtami Vrat 2022 Puja Vidhi and Mantra)
-
काल भैरव को समर्पित इस व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-ध्यान करें और साफ कपड़ा धारण करें।
-
इसके बाद घर में पूजा घर में या शिव मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करें।
-
घर में भगवान काल भैरव की पूजा करने के लिए पूजा स्थल पर काला कपड़ा बिछाएं और उसपर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें।
-
इसके बाद इस दिन काल भैरव को काली उड़द और उड़द से बनी मिठाई इमरती, दही बड़े, दूध और मेवे का भोग अवश्य लगाएं। यह उन्हें बहुत प्रिय हैं।
-
इसके साथ उन्हें सरसों का तेल, चमेली का तेल इत्यादि अर्पित करें।
-
इस दिन 'अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्, भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि ।।' मंत्र का जाप जरूर करें।
काल भैरव के अन्य शक्तिशाली मंत्र (Kaal Bhairav Mantra)
-
ॐ भयहरणं च भैरव:।
-
ॐ कालभैरवाय नम:।
-
ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।
-
ॐ भ्रं कालभैरवाय फट्।
डिसक्लेमर- इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।