ऐसे करें सुंदरकांड का पाठ, ये सारे काम अवश्य पूरे होंगे
हनुमान जी को संकटमोचक के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि हनुमान नाम लेने भर से बुरी और नकरात्मक शक्तियां भाग जाती है। वहीं हनुमान चालीसा को नियमित रूप से जपने पर हर तरह की बाधाओं से मुक्ति पाई जा सकती है। इसके अलावा सुंदर कांड
हनुमान जी को संकटमोचक के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि हनुमान नाम लेने भर से बुरी और नकरात्मक शक्तियां भाग जाती हैं। वहीं हनुमान चालीसा को नियमित रूप से जपने पर हर तरह की बाधाओं से मुक्ति पाई जा सकती है। इसके अलावा सुंदर कांड का पाठ करने से मन को शांति मिलने के साथ कई लाभ मिलते हैं। श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड अध्याय में बजरंग बली की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसमें विशेष रूप से हनुमान जी के विजय का गान किया गया है जो पढ़ने वाले में आत्मविश्वास का संचार करता है। सुंदरकांड पाठ की सबसे खास बात यह है कि इससे ना सिर्फ हनुमानजी का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि भगवान श्रीराम का भी आर्शीवाद प्राप्त होता है।
ज्योतिषियों के अनुसार विशेष रूप से शनिवार तथा मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करने वाले को सभी विपत्तियों से छुटकारा मिलता है और अनेकानेक अच्छे परिणाम सामने आते हैं। इसके सस्वर पाठ से घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां यथा भूत-प्रेत, चुडैल, डायन आदि भी घर से चली जाती हैं। साथ ही घर के सदस्यों पर आए बड़े से बड़े संकटों सहज ही टल जाते हैं। इसके अलावा यदि जन्मकुंडली या गोचर में शनि, राहु, केतु या अन्य कोई दुष्ट ग्रह बुरा असर दे रहा है तो वह भी सहज ही टल जाता है। शनि की साढ़े साती व ढैय्या में इसका प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है।
ऐसे करें सुंदरकांड का पाठ
सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से शनिवार तथा मंगलवार को करने पर सभी संकटों का नाश करता है। परन्तु आवश्यकता होने पर इसका पाठ कभी भी किया जा सकता है। पाठ करने से पहले भक्त को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद किसी निकट के मंदिर अथवा घर पर ही एक चौकी पर हनुमानजी की प्रतिमा को विराजमान कर स्वयं एक आसन पर बैठ जाएं। इसके बाद बजरंगबली की प्रतिमा को सादर फूल-माला, तिलक, चंदन, आदि पूजन सामग्री अर्पण करनी चाहिए।
यदि किसी हनुमान मंदिर में कर रहे हैं तो उनकी हनुमान प्रतिमा को चमेली का तेल मिश्रित सिंदूर भी चढ़ा सकते हैं। देसी घी का दीपक जलाना चाहिए। इसके बाद भगवान श्रीगणेश, शंकर-पार्वती, भगवान राम-सीता-लक्ष्मण तथा हनुमान जी को प्रणाम कर अपने गुरुदेव तथा पितृदेवों का स्मरण करें। तत्पश्चात हनुमानजी को मन-ही-मन ध्यान करते हुए सुंदरकांड का पाठ आरंभ करें। पूर्ण होने पर हनुमानजी की आरती करें, प्रसाद चढ़ाएं तथा वहां मौजूद सभी लोगों में बांटे। आपके सभी बिगड़े हुए काम तुंरत ही पूरे होंगे।
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