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Ravi Pradosh Vrat 2023: आज प्रदोष काल में जरूर करें यह उपाय, भगवान शिव होंगे प्रसन्न

Pradosh Vrat 2023 प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की उपासना करने से सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं और भक्तों को धन-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। आज रवि प्रदोष व्रत के दिन साधकों को संध्या पूजा के समय कुछ विशेष उपाय करने चाहिए।

By Shantanoo MishraEdited By: Shantanoo MishraPublished: Sun, 19 Mar 2023 12:30 PM (IST)Updated: Sun, 19 Mar 2023 12:30 PM (IST)
Ravi Pradosh Vrat 2023: आज शाम जरूर करें ये खास उपाय।

नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क | Ravi Pradosh Vrat 2023: प्रत्येक माह के त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा का विधान है। आज यानी 19 मार्च 2023, रविवार के दिन (चैत्र कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को) रवि प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। यह विक्रम संवत 2079 का अंतिम प्रदोष व्रत भी है। मान्यता है कि आज के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की उपासना करें सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। रवि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के साथ-साथ सूर्यदेव की उपासना का भी विशेष महत्व है।

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शास्त्रों में बताया गया है की प्रदोष व्रत के दिन साधक को संध्या काल में भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए। हिंदू पंचांग के अनुसार आज पूजा के लिए शुभ समय शाम 06 बजकर 31 मिनट से रात 08 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में कुछ विशेष उपाय करने से व्यक्ति को आरोग्यता, सुख-समृद्धि एवं मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।

चैत्र रवि प्रदोष व्रत 2023 उपाय (Chaitra Ravi Pradosh Vrat 2023 Upay)

  • आज रवि प्रदोष व्रत के दिन वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए प्रदोष काल में भगवान शिव का जलाभिषेक करें और 11 बेलपत्र अर्पित करें। इस अवधि में निरंतर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते रहें।

  • प्रदोष काल में भगवान शिव को दही और शहद का भोग लगाएं। ऐसा करने से भी दांपत्य जीवन में आ रही समस्याएं दूर हो जाती हैं और सभी संकटों का नाश होता है।

  • शास्त्रों में बताया गया है कि रवि प्रदोष व्रत के दिन संध्या काल में जरूरतमंद लोगों को दूध और चावल का दान करें। ऐसा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

  • धन संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करें। साथ ही शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें और पूजा के अंत में आरती करना ना भूलें। शास्त्रों में बताया गया है कि बिना आरती के कोई भी पूजा संपन्न नहीं होती है।

डिसक्लेमर- इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।


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