Bati ke Niyam: पूजा के बाद जली हुई बाती का क्या करें, इस भूल से लग सकता है दोष
पूजा में इस्तेमाल हुई बाती को कभी भी कूड़ेदान में या फिर इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए वरना इससे आपको दोष का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में आज हमको बताने जा रहे हैं कि दीपक जलाने के बाद आप उसकी बाती (Jali hui bati ka kya kare) का क्या करना चाहिए ताकि आपको इसके नकारात्मक परिणाम न मिलें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाना भी एक जरूरी प्रक्रिया है, जिसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। हिंदू धर्म में दीपक को ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। कई बार यह समझ नहीं आता कि दीपक जलाने के बाद उसकी जली हुई बाती का क्या किया जाए और लोग इसे इधर-उधर फेंक देते हैं। लेकिन ऐसा करने बिल्कुल भी शुभ नहीं माना जाता।
इस काम से मिलेगा लाभ
दीपक जलाने के बाद बची हुई को फेकने के स्थान पर आप उसे इकट्ठा कर सकते हैं। ध्यान रखें कि जली हुई बाती को हमेशा पवित्र स्थान पर ही रखें। आप पूजा घर में ही एक पात्र में बाती इकट्ठी करके रख सकते हैं। ऐसा आपको लगातार 10 दिनों तक करना है और 11वें दिन इन सभी बाती को एक साथ कपूर और चार लौंग डालकर जला दें। इसके बाद इसका धुआ पूरे घर में करें और दीपक को घर की छत पर रख दें। ऐसा करने से आपको नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिल सकती है।
राख का भी कर सकते हैं उपयोग
बची हुई बाती से यह उपाय करने के बाद आप उसकी राख का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप इस राख का तिलक लगाते हैं, तो इससे आपको नजर दोष से छुटकारा मिल सकता है। वहीं अगर घर में किसी बच्चे को नजर लग गई है, तो इसके लिए बाती की बची हुई राख को उस बच्चे के ऊपर से सात बार घुमाएं औरृ किसी पेड़ में डाल दें।
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(Picture Credit: Freepik) (AI Image)
नहीं लगेगा दोष
दोष से बचने के लिए आप पूजा में जली हुई बाती को किसी बहते हुए साफ जल स्त्रोत जैसे नदी, तालाब आदि में प्रभावित कर सकते हैं। अगर आपके लिए ऐसा करना संभव नहीं है, तो इस स्थिति में आप पूजा में इस्तेमाल बाती को मिट्टी में भी दबा सकते हैं। इससे आपको बाती को फेंकने का दोष नहीं लगता।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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