Bajrang Baan ka Mahatva: बड़ा मंगलवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करते समय रखें इन बातों का ध्यान
Bajrang Baan ka Mahatva हिंदू धर्म में मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दी हनुमान जी की उपासना करने से व्यक्ति धन ऐश्वर्य और बुद्धि की प्राप्ति होती है।

नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Bajrang Baan ka Mahatva: हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करने से व्यक्ति को कष्ट, रोग एवं दोष से मुक्ति प्राप्त हो जाती है। शास्त्रों में भी हनुमान चालीसा या बजरंग बाण के पाठ को बहुत लाभकारी माना गया है। जो व्यक्ति मंगलवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करता है, उसे कई प्रकार के ग्रह दोष से भी मुक्ति प्राप्त हो जाती है। साथ ही बजरंग बाण का पाठ करने से जीवन में सुख, समृद्धि एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। वास्तु दोष मिटाने के लिए भी इस सिद्ध स्तोत्र के पाठ को बहुत ही लाभकारी माना गया है। आइए जानते हैं बजरंग बाण के नियम और महत्व
बजरंग बाण पाठ के नियम
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ज्योतिष शास्त्र में बताया है कि मंगलवार के दिन व्यक्ति को निश्चित रूप से बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए।
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बजरंग बाण का पाठ करने के बाद हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। साथ ही सभी मनोकामना पूर्ण हो, इसके लिए 41 दिनों तक लगातार बजरंग बाण का पाठ करें।
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विद्वान बताते हैं बजरंग बाण के पाठ को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा करने से कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
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बजरंग बाण का पाठ करते समय व्यक्ति को वस्त्र का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उसे इस दिन लाल वस्त्र या लाल रंग के आसन पर बैठकर ही पाठ करना चाहिए। साथ ही पाठ करने से पहले ब्रह्मचर्य का पालन निश्चित रूप से करना चाहिए।
बजरंग बाण पाठ करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बजरंग बाण का पाठ शुरू करने से पहले व्यक्ति को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बजरंग बाण का पाठ रात्रि 11 बजे से 1 बजे के बीच करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इससे पहले एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछा लें और चौकी को पूर्व दिशा में स्थापित करें। फिर चौकी के दायीं तरफ घी का दिया जलाएं और चौकी पर 'ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट' इस मंत्र को कागज पर लिखकर चौकी पर रख दें। पाठ के बाद इस मंत्र को मंदिर में स्थापित करें और उसकी विधिपूर्वक पूजा करें।
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