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    Anant Chaturdashi 2023: अनंत चतुर्दशी के दिन इस विधि से करें पूजा, मिलेगा भगवान श्री हरि का आशीर्वाद

    Anant Chaturdashi Puja सनातन धर्म में भगवान विष्णु को जगत के पालनहार के रूप में जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनंत चतुर्दशी का दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना का लिए समर्पित है। अनंत चतुर्दशी को चौदस भी कहा जाता है। इस विशेष अवसर पर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    By Suman SainiEdited By: Suman SainiUpdated: Wed, 27 Sep 2023 11:25 AM (IST)
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    Anant Chaturdashi 2023 अनंत चतुर्दशी के दिन इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा।

    नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Lord Vishnu Puja: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को गणपति उत्सव का समापन होता है, इसी दिन गणेश विसर्जन किया जाता है। अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन के लिए तो जाना ही जाता है साथ ही इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। इस साल अनंत चतुर्दशी 28 सितंबर 2023 को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं कि भगवान विष्णु की पूजा विधि। 

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    भगवान विष्णु पूजा विधि (Lord Vishnu Puja Vidhi)

    अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं। इसके बाद साफ व पीले रंग के वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद कलश स्थापना करें और उसमें अष्टदल कमल रखें। भगवान की प्रतिमा या तस्वीर पर केसर, कुमकुम, हल्दी, फूल, अक्षत, फल और भोग आदि अर्पित करें।

    इसके बाद एक कच्ची डोरी लेकर उसमें चौदह गांठ लगाएं और इसे भगवान श्री हरि को अर्पित करें। इस दौरान ऊँ अनंताय नमः मंत्र का जाप करें। फिर इसे अपनी कलाई पर बांधे। मान्यता है कि इस रक्षा सूत्र को धारण करने से आरोग्य का वरदान मिलता है। साथ ही सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी करें। अब आटे की रोटियां या फिर पूड़ी बनाकर प्रसाद के रूप में बांटें।

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    अनंत चतुर्दशी का महत्व (Anant Chaturdashi Importance)

    अनन्त चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत रूपों की पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन माना गया है। इस दिन साधक उपवास रखते हैं और पूजा के दौरान पवित्र धागा बांधते हैं। जिसमें चौदह गांठ लगाई जाती हैं और भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है।

    ऐसा माना जाता है कि इस रक्षा सूत्र को अपनी कलाई पर धारण करने से स्वयं भगवान विष्णु अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। साथ ही यह भी माना जाता है कि अनन्त चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना और उपवास करने से साधक को बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'