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    Aja Ekadashi Vishnu Stuti And Mantra: स्तुति और मंत्रों का जाप करने से भगवान विष्णु हो जाते हैं प्रसन्न

    By Shilpa SrivastavaEdited By:
    Updated: Sat, 15 Aug 2020 03:20 PM (IST)

    Aja Ekadashi Vishnu Stuti And Mantra आज अजा एकादशी है। यह व्रत भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है और यह आज है।

    Aja Ekadashi Vishnu Stuti And Mantra: स्तुति और मंत्रों का जाप करने से भगवान विष्णु हो जाते हैं प्रसन्न

    Aja Ekadashi Vishnu Stuti And Mantra: आज अजा एकादशी है। यह व्रत भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है और यह आज है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत के दौरान पूजा करने पर अगर विष्णु जी की स्तुति की जाए तो उनकी कृपा बनी रहती है। अगर व्यक्ति पूरे भाव के साथ इस मंत्र की स्तुति का जाप करते हैं तो श्रीहरि नारायण प्रसन्न हो जाते हैं। अजा एकादशी की पूजा करते समय इस मंत्र को पढ़ना न भूलें। तो चलिए पढ़ते हैं पवित्र विष्णु स्तुति-

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    विष्णु स्तुति:-

    शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं

    विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम्।

    लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं

    वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम्।।

    यं ब्रह्मा वरुणैन्द्रु रुद्रमरुत: स्तुन्वानि दिव्यै स्तवैवेदे:।

    सांग पदक्रमोपनिषदै गार्यन्ति यं सामगा:।

    ध्यानावस्थित तद्गतेन मनसा पश्यति यं योगिनो

    यस्यातं न विदु: सुरासुरगणा दैवाय तस्मै नम:।।

    स्तुति के अलावा श्री विष्‍णु के प्रमुख मंत्रों का जाप करना भी फलदायक माना गया है। जागत के पालनहार श्री‍हरि विष्णु का स्वरूप बेहद शांत और आनंदमयी है। ऐसा माना जाता है कि अगर नियमित तौर पर भगवान विष्णु को याद किया जाए तो व्यक्ति के जीवन के समस्त संकटों का नाश होता है। साथ ही धन-वैभव की प्राप्ति भी होती है। आज अजा एकादशी के दिन अगर कोई व्यक्ति स्तुति के साथ निम्न मंत्रों का जाप भी करता है तो यह बेहद शुभ होता है। तो चलिए पढ़ते हैं भगवान विष्णु के मंत्र।

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

    श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।

    हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

    ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

    ॐ विष्णवे नम:

    ॐ हूं विष्णवे नम:

    ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।

    दन्ताभये चक्र दरो दधानं,

    कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।

    धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया

    लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।

    ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।

    ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।

    ॐ अं वासुदेवाय नम:

    ॐ आं संकर्षणाय नम:

    ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:

    ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:

    ॐ नारायणाय नम:

    ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्‍टं च लभ्यते।।