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पिठोरी अमावस्‍या पर ऐसे करें 64 योगिनियों का व्रत और पूजा; बढ़ेगी संतान की आयु

Published: Thu, 10 Sep 2026 01:42 PM (IST)

पिठोरी अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, जब माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि ...और पढ़ें

संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करें ये पूजा। (Picture Credit- AI Generated)

संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करें ये पूजा। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पिठोरी अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगल की कामना से व्रत रखती हैं। माना जाता है कि इस दिन 64 योगिनियों और सप्त मातृकाओं की पूजा करने से मातृशक्ति प्राप्त होती है और संतान के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। आइए जानते हैं पिठोरी अमावस्या पर व्रत और पूजा की सरल विधि।

सुबह स्नान करके लें संकल्प

व्रत रखने वाली माता सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करें। भगवान गणेश, माता पार्वती और 64 योगिनियों का ध्यान करके संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन श्रद्धा और संयम के साथ व्रत रखें। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्रत का तरीका पहले ही तय करें। आप इसमें निर्जला या फलाहार व्रत रख सकती हैं।

बनाएं देवी-देवताओं के प्रतीक

पिठोरी अमावस्या की पूजा में देवी पिठोरी, सप्त मातृकाओं और 64 योगिनियों का विशेष महत्व है। गेहूं के आटे या गोबर से इनके छोटे-छोटे प्रतीक बनाएं। सप्त मातृकाओं में ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, इंद्राणी और चामुंडा को शामिल किया जाता है। इन प्रतीकों को साफ चौकी पर विधि के अनुसार स्थापित किया जाता है।

प्रदोष काल में करें पूजा

शाम के समय प्रदोष काल में इनकी पूजा करें। चौकी पर देवी पिठोरी, सप्त मातृकाओं और 64 योगिनियों के प्रतीकों को स्थापित करके उनका पूजन करें। सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें। इसके बाद सभी मातृशक्तियों का ध्यान करके श्रद्धापूर्वक पूजा शुरू करें।

अर्पित करें पूजा सामग्री

पूजा में रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। इसके साथ फल, मिष्ठान्न और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य प्रसाद चढ़ाएं। इस पूजा में सुहाग की सामग्री भी देवी को अर्पित की जाती है। पूजा के दौरान संतान की रक्षा, अच्छी सेहत की कामना की जाती है।

अतः इस तरह से पूजा संपन्न होती है और 64 योगिनियों का आशीर्वाद आपको प्राप्त हो जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है