हनुमान जी का यह प्राचीन मंदिर है बेहद रहस्यमयी, महाभारत काल से जुड़ी है पौराणिक कथा
राजस्थान के अलवर जिले में स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर आस्था और पौराणिक मान्यताओं का संगम है। यह महाभारत काल से ...और पढ़ें

सरिस्का का पांडुपोल हनुमान मंदिर। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर आस्था, प्रकृति और पौराणिक मान्यताओं का अनोखा संगम है। पहाड़ों और जंगलों से घिरा यह मंदिर दूर से देखने पर बहुत ही ज्यादा रहस्यमयी लगता है। इस मंदिर को देखने केवल हनुमान भक्त ही नहीं बल्कि यात्री भी पहुंचते हैं क्योंकि यह बहुत ही खूबसूरत है। इस मंदिर के तार महाभारत काल से जुड़े हुए हैं। इस मंदिर के बारे में सरकारी वेबसाइट इंक्रेडिबल इंडिया पर भी काफी जानकारी उपलब्ध है। चलिए हम इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा और रोचक रहस्य के बारे में आपको बताते हैं।
महाभारत काल से जुड़ी मान्यता
पांडुपोल मंदिर का संबंध महाभारत काल की कथाओं से माना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र में कुछ समय बिताया था। इसी वजह से इस स्थान को पांडुपोल नाम मिला।
इस मंदिर से भीम और भगवान हनुमान की प्रसिद्ध कथा भी जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि एक बार भीम को अपने बल पर बहुत गर्व हो गया था। तब हनुमान जी ने वृद्ध वानर का रूप धारण कर उनकी परीक्षा ली। उन्होंने अपनी पूंछ रास्ते में रख दी और भीम से उसे हटाने को कहा। अपनी पूरी ताकत लगाने के बाद भी भीम पूंछ को हिला नहीं सके। तब उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने हनुमान जी को पहचान लिया।
लेटी हुई हनुमान प्रतिमा
पांडुपोल मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित भगवान हनुमान की प्रतिमा है। मंदिर के गर्भगृह में हनुमान जी की प्रतिमा लेटी हुई यानी शयन मुद्रा में है। इस तरह की प्रतिमा बहुत कम स्थानों पर देखने को मिलती है। इसी कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। मंदिर में भक्त हनुमान जी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है।
पहाड़ों के बीच खूबसूरत झरना
मंदिर के आसपास के प्राकृतिक दृश्य भी बहुत खूबसूरत हैं। पहाड़ों के बीच से निकलता लगभग 35 फीट ऊंचा झरना यहां आने के लिए लोगों का ध्यान आकर्षित करता है।
मंदिर तक कैसे पहुंचें?
पांडुपोल हनुमान मंदिर अलवर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर सरिस्का टाइगर रिजर्व के अंदर स्थित है। चूंकि यह क्षेत्र वन्यजीवों का सुरक्षित इलाका है, इसलिए यहां आने-जाने के नियम सामान्य पर्यटन स्थलों से अलग हैं।
जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निजी वाहनों को मंदिर तक जाने की अनुमति आमतौर पर मंगलवार और शनिवार को दी जाती है।
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