यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 19, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आइए जानें भारत के कुछ अनोखे प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के बारे में
ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी की यह मूर्ति गोस्वामी तुलसीदासजी के तप एवं पुण्य से प्रकट हुई है।.

कलयुग में हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां अवतार माना जाता है। हनुमान ही एक ऐसे भगवान हैं जिनकी पूजा सबसे ज़्यादा की जाती है। यही कारण है कि पूरे भारत में हनुमान जी के कई प्रचीन और चमत्कारी मंदिर स्थित हैं। इनमें से हर मंदिर की अपनी अलग विशेषता है। कुछ मंदिर अपनी प्राचीनता के लिये पहचाने जाते हैं, तो कुछ मंदिर अपनी भव्यता के लिए। जबकि कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जो अपनी अनोखी मूर्त्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं, जैसे इलाहबाद का हनुमान मंदिर। यह भारत का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा है।वहीं गुजरात के जामनगर में स्थित बाल हनुमान मंदिर का नाम एक अनोखे रिकॉर्ड के चलते ‘गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में शामिल है।
हनुमान मंदिर, इलाहबाद, उत्तर प्रदेश
इलाहबाद किले से सटा यह मंदिर लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा वाला एक छोटा किंतु प्राचीन मंदिर है। यह संपूर्ण भारत का केवल एकमात्र मंदिर है जिसमें हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में हैं। यहां पर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा 20 फीट लम्बी है।
हनुमानगढ़ी, अयोध्या
धर्मिक ग्रंथों के अनुसार अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है। यहां का सबसे प्रमुख श्री हनुमान मंदिर हनुमानगढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर राजद्वार के सामने ऊंचे टीले पर स्थित है इसीलिए यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 70 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यह मंदिर काफ़ी भव्य है और मंदिर के चारों ओर साधु-संत रहते हैं। हनुमानगढ़ी के दक्षिण में सुग्रीव टीला व अंगद टीला नामक स्थान भी हैं।
सालासर बालाजी हनुमान मंदिर
हनुमान जी का यह मंदिर राजस्थान के चूरू जिले में है। गांव का नाम सालासर है, इसलिए सालासर वाले बालाजी के नाम से यह मंदिर प्रसिद्ध है। हनुमान जी की यह प्रतिमा दाड़ी व मूंछ से सुशोभित है। इस मंदिर के चारों ओर यात्रियों के ठहरने हेतु धर्मशालाएं बनी हैं। माना जाता है कि हनुमान जी की यह प्रतिमा एक किसान को ज़मीन जोतते समय मिली थी, जिसे सालासर में सोने के सिंहासन पर स्थापित किया गया है। यहां हर साल चैत्र एवं वैशाख की पूर्णिमा के दिन विशाल मेला लगता है।
हनुमान धारा, चित्रकूट
उत्तर प्रदेश के सीतापुर नामक स्थान के पास यह हनुमान मंदिर स्थित है। सीतापुर से हनुमान धारा की दूरी तीन मील है। यह स्थान पर्वतमाला के मध्यभाग में है। पहाड़ के सहारे हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति के सिर पर दो जल के कुंड हैं, जो हमेशा जल से भरे रहते हैं और उनमें से निरंतर पानी बहता रहता है। इस धारा का जल हनुमान जी को स्पर्श करता हुआ बहता है। इसीलिए इसे हनुमान धारा कहते हैं। इस स्थान के बारे में एक कथा प्रसिद्ध है- श्रीराम के अयोध्या में राज्याभिषेक होने के बाद एक दिन हनुमान जी ने भगवान श्रीरामचंद्र से कहा- “हे भगवन! मुझे कोई ऐसा स्थान बतलाइए, जहां लंका दहन से उत्पन्न मेरे शरीर का ताप मिट सके.” तब भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को यह स्थान बताया।
श्री संकटमोचन मंदिर, वाराणसी
यह मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में स्थित है। इस मंदिर के चारों ओर एक छोटा सा वन है। यहां का वातावरण एकांत, शांत एवं उपासकों के लिए साधना करने के लिए योग्य है। मंदिर के प्रांगण में श्री हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा है। श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर के पास ही भगवान श्री नृसिंह का मंदिर भी है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी की यह मूर्ति गोस्वामी तुलसीदासजी के तप एवं पुण्य से प्रकट हुई है।. इस मूर्ति में हनुमान जी दाएं हाथ में भक्तों को अभयदान कर रहे हैं एवं बायां हाथ उनके ह्रदय पर स्थित है। प्रत्येक कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को सूर्योदय के समय हनुमान जी की विशेष आरती होती है।
श्री कष्टभंजन हनुमान मंदिर,गुजरात
बोटाद जंक्शन से सारंगपुर लगभग 12 मील दूर है। यहां एक प्रसिद्ध मारुति प्रतिमा है। महायोगिराज गोपालानंद स्वामी ने इस शिला मूर्ति की प्रतिष्ठा 1905 में की थी। कहा जाता है कि प्रतिष्ठा के समय मूर्ति में श्री हनुमान जी का आवेश हुआ और यह हिलने लगी। तभी से इस मंदिर को कष्टभंजन हनुमान मंदिर कहा जाने लगा है।
उल्टे हनुमान का मंदिर, इंदौर
भारत की धार्मिक नगरी उज्जैन से केवल 30 किमी दूर स्थित है भगवान हनुमान का यह भव्य मंदिर। यहां उनकी उल्टे रूप में पूजा की जाती है। यह मंदिर सांवेर नामक स्थान पर है। इस मंदिर को कई लोग रामायण काल के समय का बताते हैं। मंदिर में भगवान हनुमान की उल्टे मुख वाली सिंदूर से सजी मूर्ति विराजमान है। सांवेर का यह मंदिर हनुमान भक्तों के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। यहां आ कर भक्त भगवान की अटूट भक्ति में लीन होकर सभी चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं।
श्री बाल हनुमान मंदिर, जामनगर
सन् 1540 में जामनगर की स्थापना के साथ ही स्थापित यह हनुमान मंदिर, गुजरात के गौरव का प्रतीक है। यहां सन् 1964 से “श्री राम धुनी” का जाप लगातार चलता आ रहा है, जिस कारण इस मंदिर का नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।
महावीर हनुमान मंदिर, पटना
पटना जंक्शन के ठीक सामने महावीर मंदिर है। उत्तर भारत में मां वैष्णों देवी मंदिर के बाद यहां ही सबसे ज़्यादा चढ़ावा आता है। इस मंदिर के अंतर्गत बहुत से अनाथालय एवं अस्पताल चल रहे हैं। यहां श्री हनुमान जी संकटमोचन रूप में विराजमान हैं।
श्री पंचमुख आंजनेयर हनुमान, तमिलनाडू
तमिलनाडू के कुम्बकोनम नामक स्थान पर श्री पंचमुखी आंजनेयर स्वामी जी (श्री हनुमान जी) का बेहद ही सुंदर मठ है। यहां पर श्री हनुमान जी की “पंचमुख रूप” में मूर्ति स्थापित है, जो अत्यंत भव्य एवं दर्शनीय है। यहां की प्रचलित कथाओं के अनुसार जब अहिरावण तथा उसके भाई महिरावण ने श्री राम को लक्ष्मण सहित अगवा कर लिया था, तब प्रभु श्री राम को ढूंढ़ने के लिए हनुमान जी ने पंचमुख रूप धारण कर इसी स्थान से अपनी खोज प्रारम्भ की थी। और इसी रूप में उन्होंने अहिरावण और महिरावण का वध भी किया था। यहां पर हनुमान जी के पंचमुख रूप के दर्शन करने से मनुष्य सभी प्रकार के संकटों एवं बंधनों से मुक्त हो जाता है।
