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क्या आप जानते हैं केदारनाथ मंदिर में क्यों है त्रिभुजाकार शिवलिंग? पुराणों में छिपा है जवाब

Published: Sat, 16 May 2026 01:30 PM (IST)

केदारनाथ मंदिर में स्थापित त्रिकोणीय शिवलिंग का रहस्य महाभारत काल से जुड़ा है, जब पांडवों को शिवजी ने बैल रूप ...और पढ़ें

केदारनाथ का शिवलिंग बाकी शिवलिंगों से क्यों है अलग? (Image Source: Instagram)

केदारनाथ का शिवलिंग बाकी शिवलिंगों से क्यों है अलग? (Image Source: Instagram)  

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शिव पुराण के अनुसार, 12 ज्योतिर्लिंग हैं, जिन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है।महादेव को समर्पित ज्योतिर्लिंग देश की अलग-अलग जगहों पर स्थापित हैं। ज्योतिर्लिंग को महादेव की शक्ति का केंद्र माना जाता है। इन्हीं 12 ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ मंदिर भी शामिल है।

मंदिर में स्थापित शिवलिंग का आध्यात्मिक महत्व बेहद अनोखा और गहरा है। इस मंदिर में शिवलिंग त्रिकोणीय आकार का है। यह एक विशाल चट्टान का हिस्सा है, जिसे स्वयंभू माना जाता है। अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि केदारनाथ का शिवलिंग त्रिभुजाकार क्यों है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं इस त्रिभुजाकार शिवलिंग के रहस्य के बारे में।

kedarnath temple

(Image Source: AI-Generated)  

क्यों खास है त्रिभुजाकार शिवलिंग? 

पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडवों को अपने ही कुल के लोगों की हत्या का पछतावा का सामना करना पड़ा। पांडव मृत्यु के पाप से छुटकारा पाना चाहते थे। इसलिए वे महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन पांडवों से भगवान शिव नाराज थे और उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे।

भगवान शिव पांडवों से रुष्ट थे। इसलिए महादेव ने पांडवों से बचने के लिए बैल का रूप धारण किया। भीम में अपार शक्ति थी, जिसकी मदद से भीम ने महादेव को पहचान लिया। इसलिए भीम से बचने के लिए महादेव धरती में समाने लगे, तो भीम ने शिव जी को पकड़ने की कोशिश की, जिसकी वजह से बैल का पूरा हिस्सा जमीन में धस गया है, लेकिन पीठ का हिस्सा वही रह गया। आज वही त्रिकोणीय शिवलिंग को महादेव के रूप में पूजा जाता है।

यह मंदिर विशाल पठार के बीच में बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी ई.पू. में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने करवाया था। केदारनाथ मंदिर के मुख्य द्वार पर नंदी बैल की एक विशाल प्रतिमा विराजमान है। केदारनाथ मंदिर का शिवलिंग त्रिदेवों का प्रतीक माना जाता है।

दूर-दूर से आते हैं भक्त

केदारनाथ में इस शिवलिंग के दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं और मंदिर में आने पर भक्तों के मन को बेहद शांति मिलती है। केदारनाथ के त्रिभुजाकार शिवलिंग का वर्णन स्कंद पुराण के केदारखंड में बताया गया है। इस बार केदारनाथ मंदिर की यात्रा 22 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और मंदिर के कपाट नवंबर तक खुले रहेंगे।

केदारनाथ के अलावा महादेव के अंग अलग-अलग जगहों पर प्रकट हुए, जिन्हें पंचकेदार के नाम से जाना जाता है।

कौन-से हैं पंचकेदार?

  1. केदारनाथ 
  2. तुंगनाथ
  3. रुद्रनाथ
  4. मदमहेश्वर
  5. कल्पेश्वर

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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