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Jyotirlingas of Lord Shiva: एक क्लिक में जानें सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थान और उनका महत्व

Published: Thu, 19 Feb 2026 01:29 PM (IST)

पढ़ें भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों की महिमा के बारे में, जो करोड़ों भक्तों की आस्था के केंद्र हैं। 'ज्योतिर्लिंग' ...और पढ़ें

Jyotirlingas: 12 ज्योतिर्लिंग का महत्व (Image Source: AI-Generated)

Jyotirlingas: 12 ज्योतिर्लिंग का महत्व (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने वाले व्यक्ति के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

  2. रामेश्वरम की स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी

  3. औरंगाबाद (संभाजीनगर) में स्थित घृष्णेश्वर अंतिम ज्योतिर्लिंग है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों की महिमा केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भक्तों की आस्था और अटूट विश्वास का केंद्र है। 'ज्योतिर्लिंग' का अर्थ है 'प्रकाश का स्तंभ'। पौराणिक कथाओं और शिव पुराण में वर्णित जानकारी के अनुसार, जब ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ, तब शिव जी एक अनंत प्रकाश स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे।

1. सोमनाथ (गुजरात)

यह पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां पूजा करने से चंद्र देव को दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति मिली थी।

2. मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश)

श्रीशैल पर्वत पर स्थित इस मंदिर में शिव और शक्ति (पार्वती) दोनों के दर्शन होते हैं। इसे 'दक्षिण का कैलाश' भी कहा जाता है।

3. महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश)

उज्जैन में स्थित यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां की 'भस्म आरती' पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। स्थानीय परंपराओं और इतिहास के मुताबिक, महाकाल काल के भी रक्षक माने जाते हैं।

4. ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)

नर्मदा नदी के बीच एक द्वीप पर स्थित यह ज्योतिर्लिंग 'ॐ' के आकार का दिखाई देता है।

5. केदारनाथ-रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड)

हिमालय की गोद में स्थित केदारनाथ के दर्शन के बिना चार धाम की यात्रा अधूरी मानी जाती है। यह साल में केवल 6 महीने ही खुलता है।

6. भीमाशंकर (महाराष्ट्र)

पुणे के पास स्थित इस ज्योतिर्लिंग का संबंध भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर राक्षस के वध से जुड़ा है।

Mahadev

(Image Source: AI-Generated)

7. काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश)

वाराणसी को शिव की नगरी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, काशी शिव के त्रिशूल पर टिकी है और यहां प्राण त्यागने वाले को मोक्ष मिलता है।

8. त्रयंबकेश्वर (महाराष्ट्र)

नासिक के पास स्थित इस ज्योतिर्लिंग से गोदावरी नदी का उद्गम होता है। यहां के शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों के प्रतीक रूप में तीन छोटे लिंग हैं।

9. वैद्यनाथ (झारखंड)

देवघर में स्थित इस ज्योतिर्लिंग को 'रावणेश्वर' भी कहा जाता है। माना जाता है कि रावण इसे लंका ले जाना चाहता था, लेकिन भगवान की माया से यह यहीं स्थापित हो गया।

10. नागेश्वर (गुजरात)

द्वारका के पास स्थित इस ज्योतिर्लिंग का अर्थ है 'नागों के ईश्वर'। यह भक्तों को सभी प्रकार के विष और पापों से मुक्त करता है।

11. रामेश्वरम (तमिलनाडु)

रामायण के वृत्तांतों के अनुसार, लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले भगवान राम ने स्वयं इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना और पूजा की थी।

12. घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र)

औरंगाबाद (संभाजीनगर) में स्थित यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है। इसे 'घुश्मेश्वर' भी कहा जाता है और यह वंश वृद्धि व सुख-शांति के लिए प्रसिद्ध है।

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