मां वाराही धाम देवीधुरा का मंदिर देश के गिने चुने वैष्णव मंदिरों में से एक है। यह देवभूमि उत्तराखंड का अद्भुत-अलौकिक धाम है। यहां पर पृथ्वी माता की वाराही स्वरूप में पूजा होती है। भगवान विष्णु का यह धाम रक्षाबंधन के दिन पत्थर युद्ध के लिए भी प्रसिद्ध है।

पौराणिक कथा के अनुसार, जब हिरणाक्ष्य पृथ्वी को पाताल लोक ले जा रहा था तो पृथ्वी ने भगवान विष्णु से अपनी रक्षा के लिए करुण पुकार की। उनकी पुकार सुनकर भगवान विष्णु बैकुंठ छोड़कर पृथ्वी को बचाने चले आए।

भगवान विष्णु ने लिया वाराह अवतार

श्रीहरि ने वाराह अवतार लेकर पृथ्वी को अपने बाम अंग में ले लिया और उसे डूबने से बचाया, तभी से पृथ्वी स्वरूपा वैष्णवी वाराही कहलाईं। मां वाराही सदियों से यहां गुफा में विराजमान हैं, भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए उनके दर्शन करने आते हैं।

ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से गर्भ गुफा में प्रवेश कर मां वाराही का ध्यान करता है, मां वाराही उसकी समस्त मनोकामनाओं को पूरी कर देती हैं।

रक्षाबंधन पर होता पत्थर युद्ध

हर साल रक्षाबंधन के दिन यहां पत्थर से युद्ध होता है। वाराही धाम में होने वाले युद्ध को 'बग्वाल' कहा जाता है। देवीधुरा के खोलीखांड़ दुबाचौड़ में वालिक, लमगडिय़ा, चम्याल और गहड़वाल खामों यानी दलों के लोग दो भागों में बंटकर यह पत्थर युद्ध खेलते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, देवासुर संग्राम में मुचकुंद राजा की सेना ने भी भाग लिया था, जिसने असुरों को मां बाराही की कृपा से पराजित किया था। तब देव सेना ने प्रसन्न होकर प्रतीक स्वरूप बग्वाल खेली और ई-ह-हा-हा-इ-ही का वैदिक उद्घोष किया।

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Posted By: kartikey.tiwari

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