चिंतामन गणेश मंदिर की है एक अनोखी परंपरा, दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाने से पूरी होती है मनोकामना
मध्य प्रदेश के सिहोर में स्थित चिंतामन गणेश मंदिर में मनोकामना पूर्ति के लिए दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाने की अनोखी परंपरा है।
-1789790763098_m.webp)
चिंतामन गणेश मंदिर (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
चिंतामन गणेश मंदिर सिहोर, मध्य प्रदेश में स्थित है।
मनोकामना पूर्ति के लिए भक्त उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं।
इच्छा पूरी होने पर सीधा स्वास्तिक बनाकर आभार व्यक्त करते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर भगवान गणेश के प्रसिद्ध मंदिरों और उनसे जुड़ी अनोखी परंपराओं के बारे में जानना भक्तों के लिए खास होता है। देश में भगवान गणेश के कई प्राचीन मंदिर हैं, जहां अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं देखने को मिलती हैं। ऐसा ही एक प्रसिद्ध मंदिर है चिंतामन गणेश मंदिर, जहां मनोकामना से जुड़ी एक अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है। यहां श्रद्धालु अपनी इच्छा पूरी होने की प्रार्थना करते हुए मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं।
कहां है चिंतामन गणेश मंदिर?
चिंतामन गणेश मंदिर भगवान गणेश को समर्पित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन और राजधानी भोपाल के मध्य पड़ने वाले कस्बे सिहोर में है। मान्यता है कि यहां भगवान गणेश के दर्शन और पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है और उनकी चिंताएं दूर होती हैं। यही कारण है कि भगवान गणेश के इस स्वरूप को 'चिंतामन गणेश' कहा जाता है।
गणेश चतुर्थी के समय मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं उनके सामने रखते हैं।
उल्टा स्वास्तिक बनाने की क्या है मान्यता?
चिंतामन गणेश मंदिर की सबसे खास परंपराओं में से एक दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाना । मान्यता के अनुसार, जब कोई भक्त भगवान गणेश से अपनी किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करता है, तो वह मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाता है।
इसे भक्त की ओर से भगवान गणेश के सामने अपनी इच्छा रखने का एक प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु विश्वास के साथ गणपति बप्पा से अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करते हैं।
मनोकामना पूरी होने के बाद बनाते हैं सीधा स्वास्तिक
इस परंपरा का सबसे रोचक हिस्सा मनोकामना पूरी होने के बाद की पूजा से जुड़ा है। मान्यता है कि जब भक्त की इच्छा पूरी हो जाती है, तो उसे दोबारा चिंतामन गणेश मंदिर आना चाहिए।
मंदिर पहुंचकर श्रद्धालु दीवार पर बनाए गए उल्टे स्वास्तिक के स्थान पर सही यानी सीधा स्वास्तिक बनाता है। इसे भगवान गणेश के प्रति आभार व्यक्त करने और अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए धन्यवाद देने का प्रतीक माना जाता है।
क्यों खास है यह परंपरा?
हिंदू धर्म में स्वास्तिक को शुभता, मंगल और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। चिंतामन गणेश मंदिर में उल्टा स्वास्तिक बनाने की परंपरा इसी धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई मानी जाती है। भक्त अपनी इच्छा भगवान गणेश को समर्पित करते हैं और मनोकामना पूरी होने पर दोबारा आकर आभार प्रकट करते हैं।
यह परंपरा भक्त और भगवान के बीच विश्वास और श्रद्धा को दर्शाती है। हालांकि मनोकामना पूरी होना धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत विश्वास का विषय है, लेकिन इस परंपरा के कारण चिंतामन गणेश मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
यह भी पढ़ें- इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं का 20 करोड़ का बीमा, 20 लाख भक्तों की सुरक्षा का इंतजाम
यह भी पढ़ें- गणपति बप्पा के साथ क्यों बोला जाता है 'मोरिया'? जानिए भक्त गोसावी की पौराणिक कथा
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
