“गणपति बप्पा मोरिया” क्यों कहते हैं? जानिए इसके पीछे छिपी भक्त और भगवान की अनोखी कहानी
गणपति बप्पा मोरिया मंत्र में 'मोरिया' शब्द का संबंध भगवान गणेश के परम भक्त मोरिया गोसावी से है। उनकी अगाध ...और पढ़ें

गणपति बप्पा मोरया का अर्थ

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गणेश उत्सव के दौरान बोले जाने वाले सभी मंत्रों में सबसे लोकप्रिय मंत्रों में से एक है 'गणपति बप्पा मोरिया', जब लोग जोरदार उत्साह के साथ भगवान गणेश का भव्य स्वागत करते हैं और उनकी मूर्ति विसर्जन के लिए ले जाते समय और उनकी स्तुति में इस मंत्र को गाया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि, 'मोरिया' शब्द का क्या मतलब है?
जबकि 'गणपति' और 'बप्पा' दोनों ही शब्द भगवान गणेश से जुड़े हैं, वहीं मोरिया नाम उनसे सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है, बल्कि यह मोरिया गोसावी से संबंधित है, जो भगवान गणेश के अत्यंत समर्पित भक्त थे। उनकी कथा पुणे के पास चिंचवड और मोरगांव स्थित गणेश के पवित्र मंदिर से जुड़ी है।
मोर्या गोसावी की कहानी
मोरिया गोसावी भगवान गणेश के परम भक्त के रूप में जाने जाते हैं और वे 14वीं शताब्दी में रहते थे। मोरिया गोसावी का अधिक समय चिंचवाड़ में बिता , जहां वे पूजा-अर्चना करते थे।
ऐसा माना जाता है कि गणेश चतुर्थी के दौरान हर साल मोरिया गोसावी भगवान गणेश को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए चिंचवाड़ से मोरगांव तक की काफी दूरी तय करनी पड़ती थी। यह यात्रा किसी भी ऐसे भक्त के लिए सामान्य यात्रा से कहीं अधिक है, जिसने अपना पूरा जीवन भगवान गणेश को समर्पित कर दिया है। यह आस्था और समर्पण की अभिव्यक्ति थी।
जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई, यह काम उनके लिए और भी ज्यादा मुश्किल होता गया। माना जाता है कि, उनकी ऐसी स्थिति को देखते हुए भगवान गणेश ने उन्हें सपने में दर्शन दिए।

जब गणेश जी अपने भक्त से मिलने गए
पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान गणेश ने मौर्य गोसावी को कहा था कि उन्हें नदी में उनकी प्रतिमा मिलेगी। अगले दिन मौर्य गोसावी नदी पर गए और नहाने के दौरान उन्हें भगवान गणेश की मूर्ति मिली।
मोरिया गोसावी के लिए यह पल बेहद आध्यात्मिक था, क्योंकि अब उन्हें मोरगांव की लंबी यात्रा करने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि पौराणिक किंवदंती के मुताबिक गणेश मोरिया गोसावी के सामने प्रकट हुए थे। इस घटना ने मौर्य गोसावी और भगवान गणेश के बीच के बंधन को और भी मजबूत कर दिया।
भक्त 'मौर्या' क्यों कहते हैं?
यहीं से इस प्रसिद्ध मंत्र को अपना गहरा अर्थ मिलता है। मोरिया गोसावी को भगवान गणेश जी का एक साधारण भक्त माना जाता था, लेकिन धीरे-धीरे उनका नाम चिंचवाड़ और आसपास के हिस्सों में गणेश जी की परम भक्ति से जुड़ गया।
ऐसा माना जाता है कि एक प्रसिद्ध भक्ति परंपरा में मोरिया गोसावी को 'मोरिया' कहकर पुकारा जाता है और उनकी प्रतिक्रिया में उन्हें 'मंगलमूर्ति' भी कहा जाता है, जो भगवान गणेश के शुभ रूप के नामों में से एक है। इस तरह श्रद्धा से प्रेरित होकर प्रसिद्ध वाक्यांश गढ़ा गया- मंगलमूर्ति मोरिया!
भक्तों के लिए 'गणपति बप्पा मोरिया' सिर्फ एक धार्मिक नारा ही नहीं, बल्कि एक ऐसा नाम है जो भगवान गणेश के प्रति भक्त की निष्ठा को दर्शाता है।
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