गणेश चतुर्थी 2026: दिल्ली के इस मंदिर में आज होती है भगवान गणेश की शादी, निकलती है भव्य बारात और सजता है खास मंडप
दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित श्री संकटहर गणपति मंदिर में गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश का देवी रिद्धि-सिद्धि से ...और पढ़ें

भगवान गणेश का विवाह उत्सव ।

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी का त्योहार देशभर में भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान जगह-जगह गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित की जाती है और विशेष पूजा होती है। लेकिन दिल्ली में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश के विवाह का विशेष आयोजन किया जाता है। यहां गणपति बप्पा का विवाह देवी रिद्धि-सिद्धि के साथ पूरे रीति-रिवाज और उत्साह के साथ कराया जाता है।
हम बात कर रहे हैं दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव में स्थित 'श्री संकटहर गणपति मंदिर' की, जहां गणेश चतुर्थी के अवसर पर होने वाला यह विवाह उत्सव भक्तों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहता है। मंदिर में विवाह से पहले कई रस्में होती हैं। इसके बाद भगवान गणेश की भव्य बारात निकाली जाती है और विवाह के लिए सुंदर मंडप सजाया जाता है। इस मंदिर से और श्री गणेश के विवाह उत्सव से जुड़ी कुछ बेहद रोचक जानकारी हमें इस मंदिर के पुजारी चंद्र प्रकाश जी ने दी है।
वसुंधरा एन्क्लेव में स्थित है खास गणपति मंदिर
श्री संकटहर गणपति मंदिर दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव में गणपति मंदिर मार्ग पर स्थित है। मंदिर की वास्तुकला में दक्षिण भारतीय यानी द्रविड़ शैली की झलक दिखाई देती है। यहां गणेश उत्सव के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ पारंपरिक तरीके से भगवान गणेश के विवाह का आयोजन किया जाता है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, यह मंदिर वर्ष 2005 से यहां स्थापित है और तभी से यहां गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

सात दिनों तक चलता है गणपति विवाह उत्सव
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि भगवान गणेश का विवाह समारोह केवल एक दिन का नहीं होता। यहां विवाह से जुड़ी रस्में करीब सात दिनों तक चलती हैं। इस दौरान हवन-पूजन के साथ भगवान गणेश की शादी से जुड़ी अलग-अलग रस्में निभाई जाती हैं। विवाह उत्सव के दौरान संगीत, हल्दी और मेहंदी जैसी रस्मों का भी आयोजन होता है। इन कार्यक्रमों में भक्त उत्साह के साथ शामिल होते हैं।
चतुर्थी से एक दिन पहले निकलती है बारात
गणेश चतुर्थी के ठीक एक दिन पहले भगवान गणेश नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। इसे उनकी बारात के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान भक्त बड़ी संख्या में शामिल होते हैं और भजन, संगीत तथा उत्साह के साथ भगवान गणेश की बारात निकालते हैं। यह पूरा आयोजन साउथ इंडियन रीति रिवाज से किया जाता है।
खास तरीके से सजाया जाता है विवाह मंडप
भगवान गणेश और देवी रिद्धि-सिद्धि के विवाह के लिए मंदिर में विशेष मंडप तैयार किया जाता है। मंडप को फूलों और सजावटी सामग्री से आकर्षक रूप दिया जाता है। जिसे देखकर लगता है कि वाकई किसी व्यक्ति का विवाह हो रहा हो। भक्त विवाह समारोह में शामिल होकर भगवान गणेश और देवी रिद्धि-सिद्धि का आशीर्वाद लेते हैं। विवाह की रस्में पारंपरिक धार्मिक विधि से पूरी की जाती हैं।

विवाह में रुकावट दूर होने की मान्यता
मंदिर से जुड़ती साउथ इंडिया सोसाइटी के प्रेसिडेंट सुनील चुड़ामड़ी के अनुसार, भगवान गणेश के इस विवाह आयोजन से एक खास धार्मिक मान्यता भी जुड़ी हुई है। उनका कहना है कि जिन लोगों के विवाह में लंबे समय से किसी कारण से रुकावट आ रही है, वे भगवान गणेश के इस भव्य विवाह समारोह के साक्षी बनकर अपने विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
सुनील जी के मुताबिक, कई श्रद्धालु विवाह से जुड़ी परेशानियां लेकर मंदिर आते हैं और भगवान गणेश के सामने अपनी मनोकामना रखते हैं। भक्तों की आस्था है कि गणपति बप्पा का आशीर्वाद उनके जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।
महाहवन और भजनों के साथ होता है विवाह संपन्न
गणेश चतुर्थी के दिन विवाह उत्सव अपने मुख्य चरण में पहुंच जाता है। इस दिन विशेष पूजा, भजन और महाहवन का आयोजन किया जाता है। धार्मिक मंत्रोच्चार और भजनों के बीच भगवान गणेश और देवी रिद्धि-सिद्धि का विवाह संपन्न कराया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और विवाह समारोह के साक्षी बनते हैं। सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन का समापन भी बेहद भव्य तरीके से किया जाता है।
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