Mangal Mahadasha: कितने साल तक चलती है मंगल की महादशा और कैसे करें ग्रहों के सेनापति को प्रसन्न?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार वर्तमान समय में ऊर्जा के कारक मंगल देव (Mangal Mahadasha) सिंह राशि में विराजमान हैं। वहीं 28 जुलाई को मंगल देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में गोचर करेंगे। मंगल देव के राशि परिवर्तन से कई राशि के जातकों को जीवन में बदलाव देखने को मिलेगा।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। इस दिन हनुमान जी संग मंगल देव की पूजा की जाती है। साथ ही मनोवांछित फल पाने के लिए मंगलवार का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक को करियर और कारोबार में मनमुताबिक सफलता मिलती है और सभी संकटों से भी मुक्ति मिलती है।
ज्योतिष भी करियर और कारोबार संबंधी परेशानी दूर करने के लिए मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने की सलाह देते हैं। हनुमान जी की पूजा करने से शनि की बाधा भी दूर होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख एवं संकट दूर हो जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि मंगल की महादशा (Mangal ki Mahadasha) कितने साल तक चलती है और कैसे ग्रहों के सेनापति को प्रसन्न करें? आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-
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मंगल की महादशा
ज्योतिषियों की मानें तो मंगल की महादशा तकरीबन 7 साल तक चलती है। इस दौरान सभी शुभ और अशुभ ग्रहों की अंतर्दशा दशा चलती है। इनमें सबसे पहले मंगल की अंतर्दशा चलती है। मंगल की अंतर्दशा 5 महीने तक रहती है। इसके बाद राहु की अंतर्दशा चलती है। वहीं, राहु के बाद गुरु और शनि की अंतर्दशा चलती है। मंगल की महादशा में शुभ ग्रहों की अंतर्दशा में जातक को शुभ फल मिलता है। खासकर, करियर को नया आयाम मिलता है।
मंगल देव को कैसे प्रसन्न करें?
- मंगल देव को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार के दिन भक्ति भाव से हनुमान जी की पूजा करें।
- मंगलवार के दिन लाल रंग की चीजों का दान करें।
- मंगलवार के दिन गेहूं, गुड़, लाल रंग के कपड़े, मूंगफली आदि चीजों का दान करें।
- मंगलवार और शनिवार के दिन राम परिवार संग हनुमान जी की पूजा करें।
- मंगलवार के दिन कम से कम सात बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
मंगलवार मंत्र
1. ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम,
लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम !
श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे,
रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः !
2. अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः
3. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय
प्रकट-पराक्रमाय महाबलाय सूर्यकोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।
4. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय रामसेवकाय
रामभक्तितत्पराय रामहृदयाय लक्ष्मणशक्ति
भेदनिवावरणाय लक्ष्मणरक्षकाय दुष्टनिबर्हणाय रामदूताय स्वाहा।
5. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय
सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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