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पितृ पक्ष में आ रही है इंदिरा एकादशी: क्या बेटी भी कर सकती है पितरों के लिए श्राद्ध और व्रत? पढ़ें नियम

Published: Tue, 29 Sep 2026 03:00 PM (IST)

इंदिरा एकादशी 2026 में 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी, जो पितृ पक्ष के दौरान पड़ने के कारण विशेष धार्मिक महत्व ...और पढ़ें

पितृ पक्ष और इंदिरा एकादशी का शुभ संयोग

पितृ पक्ष और इंदिरा एकादशी का शुभ संयोग

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी की तिथि को अत्यंत शुभ माना जात है। भगवान विष्णु को समर्पित यह तिथि वैष्णव परंपरा में खास महत्व रखती है। यह सिर्फ उपवास का दिन नहीं है, बल्कि भगवान श्री हरि का स्मरण कर उनकी कृपा प्राप्त करने का भी सुनहरा मौका होता है। सभी 24 एकादशियों की ही तरह इंदिरा एकादशी का भी खास महत्व है।

वैदिक पंचांग के हिसाब से, हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi 2026) के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी पितृ पक्ष के दौरान पड़ती है। जिस वजह से इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं इंदिरा एकादशी में व्रत कौन रख सकता है और क्या बेटी भी पितरों की सुख-शांति के लिए व्रत का पालन कर सकती हैं।

इंदिरा एकादशी तिथि 2026 (Kab Hai Indira Ekadashi 2026)

एकादशी तिथि का आरंभ- 6 अक्तूबर 2026, मंगलवार को सुबह 2 बजकर 7 मिनट पर

एकादशी तिथि का समाप्त- 7 अक्तूबर 2026, बुधवार को सुबह 12 बजकर 34 मिनट पर

उदया तिथि के हिसाब से इस साल इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्तूबर 2026, मंगलवार के दिन रखा जाएगा।

इंदिरा एकादशी का व्रत किसे रखना चाहिए?

हिंदू धर्म शास्त्रों में एकादशी व्रत सभी रख सकते हैं, चाहे उनकी उम्र, लिंग या वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। अविवाहित लड़के और लड़कियां भी इंदिरा एकादशी का व्रत अन्य लोगों की तरह रख सकते हैं।

हालांकि गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार लोग को इस व्रत को न रखने की छूट दी जाती है।

बेटी अपने पितरों के लिए इंदिरा एकादशी का व्रत रख सकती है?

गरुड़ पुराण के अनुसार, घर की बेटियां भी अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए इंदिरा एकादशी के व्रत का पालन कर सकती है।

अगर परिवार में कोई पुरुष संतान नहीं हो या पितृ ऋण चुकाने में सक्षम नहीं हो, तो घर की बेटी को अपने पितरों के लिए पूजा, तर्पण और व्रत करने का पूर्ण अधिकार है।

इंदिरा एकादशी पर किन पितरों का होता है श्राद्ध?

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पितृ पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि पर उन पूर्वजों का श्राद्ध संपन्न किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी पक्ष की एकादशी तिथि को हुई हो। इसे 'एकादशी श्राद्ध या ग्यारस श्राद्ध' भी कहा जाता है।

इस विधि से करें पितरों का तर्पण

पितृ पक्ष 2026 के दौरान आने वाली इंदिरा एकादशी के मौके पर सुबह नहाने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद अपनी क्षमता अनुसार पितरों के निमित्त तर्पण करें। जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

पितृ पक्ष में श्राद्ध के लिए कुतुप और रोहिणी मुहूर्त बेहद शुभ माना जाता है। इसी तरह इंदिरा एकादशी के मौके पर भगवान विष्णु और अपने पितरों को याद करके दिवंगत आत्माओं का श्राद्ध करना चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।