मां की परछाई हूं मैं
हर लड़की के लिए मां उसकी रोल मॉडल होती है और वह उसी के नक्शकदम पर चलने की कोशिश करती है। तभी तो उसकी शख्सीयत में मां का अक्स नजर आता है।

हमारी जिंदगी में कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं। मां का प्यार भी ऐसा ही है। उम्र से चाहे हम कितने ही बडे क्यों न हो जाएं, पर जिंदगी की भाग-दौड से जब भी मन परेशान होता है तो बहुत याद आती है मां के आंचल की ठंडी छांव, उसके हाथों का कोमल स्पर्श और उसकी प्यार भरी नसीहतें। खास तौर पर बेटियों के दिल में मां के लिए खास जगह होती है। कुदरती तौर पर बेटी की शख्सीयत में मां की कई खूबियां मौजूद होती हैं। तभी तो वह खुद को हमेशा उसके दिल के करीब महसूस करती है। यहां कुछ मशहूर शख्सीयतें आपके साथ बांट रही हैं, अपने दिल से जुडे कुछ ऐसे ही अनुभव।
कुकिंग सीखना चाहती हूं मां से
आलिया भट्ट, अभिनेत्री
मेरी मम्मी बेहद अंडरस्टैंडिंग हैं। वह दूसरों की भावनाओं को समझना और उनका सम्मान करना बखूबी जानती हैं। वह खुद से ज्यादा दूसरों का खयाल रखती हैं। इसके अलावा मम्मी कुकिंग में भी माहिर हैं। वह इतना स्वादिष्ट खाना बनाती हैं कि खाने वाले उनकी प्रशंसा किए बगैर रह नहीं पाते। मैंने सोचा है कि कभी वक्त निकालकर उनसे कुकिंग जरूर सीखूंगी। जहां तक प्रोफेशनल लाइफ का सवाल है तो वह मुझे हमेशा वक्त की पाबंदी सिखाती हैं और शूटिंग के लिए सही समय पर पहुंचने को कहती हैं। उनका मानना है कि हमें दूसरों का वक्त बर्बाद करने का कोई अधिकार नहीं है। हां, उनकी एक बहुत बडी कमजोरी है कि वह छोटी-छोटी बातों से बहुत जल्दी घबरा जाती हैं। अगर मुझे घर लौटने में थोडी भी देर हो जाए तो वह कई बार फोन और मेसेज करती हैं, बाहर जाते वक्त मुझे सौ हिदायतें देती हैं, अगर मुझे मामूली सी भी चोट लग जाए तो आसमान सिर पर उठा लेती हैं। हालांकि इन बातों में भी कहीं न कहीं उनका प्यार छिपा होता है। फिर भी मैं उनकी ऐसी आदतों को कभी अपनाना नहीं चाहूंगी।
मम्मी का तीसरा बेटा हूं मैं
सोनाक्षी सिन्हा, अभिनेत्री
लोग कहते हैं कि मैं अपनी मां की तरह ग्रेसफुल और चार्मिग हूं। हमेशा मेरी यही कोशिश रहती है कि मैं भी उनकी तरह विनम्र बनूं। जब लोग मेरी तारीफ करते हुए कहते हैं कि सोनाक्षी तो बिलकुल अपनी मां पर गई है तब डैड को यह बात बहुत खटकती है। ऐसे में वह हमेशा यही कहते हैं कि खूबसूरती भले ही मां जैसी हो, लेकिन टैलेंट तो मुझसे ही मिला है। हां, कई मामलों में मैं मां से बिलकुल अलग हूं। उनका कहना है कि मुझमें लडकियों वाले गुण जरा भी नहीं है। मैं बचपन से ही टॉम ब्वॉय टाइप हूं। मुझे बनना-संवरना जरा भी पसंद नहीं। पर्सनल लाइफ में मैं हमेशा कैजुअल रहती हूं। बचपन में इतनी उछल-कूद मचाती थी कि मेरी यूनिफॉर्म हमेशा मिट्टी में सनी रहती थी। मैं चाहकर भी खुद को बदल नहीं पाई। इसीलिए मां मुझे बेटी नहीं, बल्कि अपना तीसरा बेटा मानती हैं।
दुनिया की सबसे अच्छी मां हैं वह
मिष्टी, अभिनेत्री
मेरी मां सिंगल पेरेंट हैं। फिर भी उन्होंने मुझे बहुत अच्छी परवरिश दी है। इसी वजह से मेरे दिल में उनके लिए बहुत ज्यादा सम्मान है। मैं सेहत और खानपान को लेकर बेहद लापरवाह हूं। इसलिए मम्मी मुझे हमेशा टोकती रहती हैं। अब मैं धीरे-धीरे अपनी आदतों में सुधार लाने की कोशिश कर रही हूं। मम्मी कंप्लीट होम मेकर हैं। वह घर को हमेशा सुंदर और व्यवस्थित रखती हैं, लेकिन इस मामले में मैं बेहद लापरवाह हूं और चाहकर भी उनकी तरह नहीं बन पाई। मां ने मुझे आत्मसम्मान और ईमानदारी के साथ जीना सिखाया है। मैं उनकी इस सीख पर पूरी तरह अमल करने की कोशिश करती हूं। उन्होंने तमाम मुश्किलें उठाते हुए अकेले मेरी परवरिश की है। इसीलिए मेरी नजरों में वह दुनिया की सबसे अच्छी मां हैं और मदर्स डे पर मैं उन्हें थैंक्स कहना चाहूंगी।
मां हैं असली सुपर स्टार
सौंदर्या रजनीकांत अश्विन, फिल्मकार
मुश्किल हालात में भी पॉजिटिव रहना मैंने मां से ही सीखा है। जहां तक मेरी प्रोफेशनल लाइफ का सवाल है तो मां को मुझसे बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं। वह मुझे हमेशा अव्वल नंबर पर देखना चाहती हैं। मैं उनकी उम्मीदों पर खरी उतरने की पूरी कोशिश कर रही हूं। मां बेहद क्रिएटिव हैं। इसलिए किसी भी प्रोजेक्ट से जुडी सारी बातें मैं उनसे जरूर डिस्कस करती हूं। मुझमें उतनी क्रिएटिविटी नहीं है। मां का यही गुण मैं अपने भीतर उतारना चाहती हूं। मेरी नजरों में मां ही असली सुपरस्टार हैं। मैं भी उनकी तरह सर्व-गुणसंपन्न बनना चाहती हूं। वह जीवन के हर किरदार को पूरे परफेक्शन से निभा रही हैं।
मां की तरह खुशमिजाज हूं मैं
गुल्की जोशी, टीवी कलाकार
मेरी मम्मी थिएटर आर्टिस्ट हैं। शायद इसी वजह से बचपन से ही अभिनय के प्रति मेरा स्वाभाविक रुझान रहा है। आज मैं जो कुछ भी हूं, उसमें पिता के साथ मां का भी बहुत बडा योगदान है। वह मेरी सबसे बडी क्रिटिक हैं। उनकी गाइडेंस मेरी प्रोफेशनल लाइफ को संवारने में बहुत मददगार साबित होती है। मम्मी की तरह मैं भी हेल्थ कॉन्शियस हूं। बचपन में मैं बहुत डरपोक थी। जब दोस्तों से लडाई होती तो मैं रोती हुई घर वापस आ जाती, लेकिन मुझे याद नहीं आता कि मम्मी ने कभी भी बीच में पडकर मेरा बचाव करने की कोशिश की हो। वह हमेशा मुझसे कहती थीं कि ऐसे मामलों से खुद ही निपटना सीखो। अगर कोई तुम्हारे साथ बुरा बर्ताव करता है तो तुम्हें उसी वक्त उसका करारा जवाब देना चाहिए। यह मम्मी की सही परवरिश का ही नतीजा है कि आज मैं इतनी कॉन्फिडेंट हूं। मां के कई गुण जन्मजात रूप से मुझमें भी मौजूद हैं। मसलन मैं भी उनकी तरह खुशमिजाज, लेकिन थोडी गुस्सैल हूं। मेरी आंखें और बाल बिलकुल मां की तरह हैं। हां, मुझे इस बात का बेहद अफसोस है कि मैं उनकी तरह गोरी नहीं हूं, लेकिन जब भी शीशे में खुद को निहारती हूं तो मुझे अपने भीतर मां की ही छवि दिखाई देती है।
प्रस्तुति : अमित कर्ण एवं विनीता
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