करियर की चिंता हर छात्र को अपने कॉलेज टाइम से होने लगती है, पर अगर पढऩा-लिखना आपको बेहद पसंद हैं तो फेलोशिप आपके करियर को यू-टर्न देने का काम कर सकती है। हर विषय और क्षेत्र के लिए बनी ये फेलोशिप स्कीम किस तरह काम करती हैं आइए जानें।

पढाई और करियर का एक साथ होना संभव नहीं होता। कई बार करियर की वजह से हायर स्टडीज में ब्रेक लगाना पड जाता है। ऐसे ही समय में फेलोशिप बडी राहत का काम करती हैं। अगर आप भी अपने करियर में भेड चाल से हटकर कुछ अलग करना चाहते हैं तो फेलोशिप इस दिशा में एक बेहतरीन अवसर है। क्या है फेलोशिप और कैसे यह करियर को दे रहा है नई दिशा, आइए जानें।

क्या है फेलोशिप

फेलोशिप कई तरह के सोशल एक्टिविटी प्रोग्राम को आगे बढाने के लिए किया जाने वाला लर्निंग प्रोग्राम है। अगर आप समाज के विचारों से अलग हट कर सोचते हैं और आपमें समाज को बदलने का जज्बा है तो आपकी इस सोच में आपका साथ देते हैं ये फेलोशिप प्रोग्राम। ये प्रोग्र्राम शॉर्ट टर्म से लेकर सालों तक के हो सकते हैं। इसमें व्यक्ति के प्रोफेशनल विकास पर फोकस किया जाता है। यह प्रोग्राम किसी ख्ाास संस्था द्वारा संचालित होते हैं जो किसी एक विषय पर काम करती है। फेलोशिप प्रोग्राम बेसिकली ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स को ध्यान में रख कर डिजाइन किए जाते हैं। फेलोशिप प्रोग्राम पब्लिक पॉलिसी, कला और शिक्षा के क्षेत्र में ज्य़ादा सक्रिय हैं। समाज की समस्याओं को बेहतर तरीके से हल करने के लिए पढे-लिखे युवाओं को इस प्रोग्राम से जोडकर फेलोशिप करियर के साथ ही साथ समाज को भी और बेहतर बनाने का काम कर रही है।

कुछ जरूरी योग्यताएं

फेलोशिप में अप्लाई करने से पहले अपनी योग्यता की जांच कर लेना भी जरूरी है। लगभग सभी फेलोशिप प्रोग्राम में कठिन परिश्रम करने वाले आत्मविश्वासी लोगों को चुना जाता है। चूंकि फेलोशिप में आपको सामाजिक कार्यों से जोडा जाता है इसलिए आपकी रुचि और ज्ञान को भी अच्छे से परखा जाता है। दो से चार पन्नों के एप्लीकेशन फॉर्म के जरिये आपकी लेखन कला को भी परखा जाता है। आपके अब तक के जीवन के पहलुओं का अच्छे से विश्लेषण किया जाता है। आपकी लीडरशिप क्वॉलिटी और कल्चरल गतिविधियों को भी परखा जाता है। एप्लीकेशन फॉर्म के साथ आपको अपना रेज्मूये भी देना होता है। लिखित परीक्षा के आधार पर ही आपको अगले पडाव में जाने का मौका मिलता है। कई बार फेलोशिप में लिखित परीक्षा के बाद पैनल इंटरव्यू होता है तो कई जगह पर्सनल इंटरव्यू होता है।

कभी-कभी लिखित परीक्षा के साथ फील्ड प्रोजेक्ट को भी शमिल किया जाता है। इसलिए शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत लोगों को इस प्रोग्राम में महत्व दिया जाता है। अपने सहायक दस्तावेज भी तैयार रखें ताकि चयन प्रक्रिया के समय आसानी रहे। अगर आप वर्किंग हैं तो भी फेलोशिप के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इन फेलोशिप प्रोग्राम से कोई भी जुड सकता है। इंटरनेट और अखबारों में आपको इससे जुडी जानकारी समय-समय पर आती रहती है। अधिकतर फेलोशिप प्रोग्राम में एप्लीकेशन फॉर्म अक्टूबर से जुलाई तक आते हैं। कोर्स की अवधि छ: महीने से लेकर दो साल तक की हो सकती है। अगर आपकी सोच और दिमाग हिम्मती है तो फेलोशिप करियर का सही चुनाव बन सकता है।

एक्सपर्ट की सलाह

रिसर्च फील्ड और अकेडमिक फील्ड से जुडे लोगों के लिए फेलोशिप बहुत बढिय़ा अवसर है। अगर आपको अपनी रुचि के हिसाब से

ही काम करने में मजा आता है तो फेलोशिप आपको देता है सुनहरा मौका। पढाई के साथ ही साथ आपको प्रैक्टिकल वर्क से भी जोडता हैै। आर्थिक सहायता फेलोशिप का सबसे बडा

प्लस प्वाइंट है जो आपके रिसर्च को पूरा होने में मदद करता है। फेलोशिप को सरकार भी सपोर्ट करती है। इस क्षेत्र में करियर बनाने का विचार समझदारी का सौदा है।

परवीन मल्होत्रा, करियर एक्सपर्ट

इन फेलोशिप के लिए दें आवेदन

टीच फॉर इंडिया फेलोशिप

यंग इंडिया फेलोशिप

गांधी फेलोशिप

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन फेलोशिप

प्राइम मिनिस्टर रूरल फेलोशिप

फेलोशिप करियर का यू-टर्न

पत्रकारिता की पढाई पूरी करने के बाद गांधी फेलोशिप ज्वाइंन करने का निर्णय यू-टर्न था। लेकिन मैं इस निर्णय से संतुष्ठ था। मैनें फेलोशिप को अपने अधूरे कामों को पूरा करने के मौके की तरह देखा। हालांकि, मैं पत्रकार बनकर हशिये पर पडे लोगों की आवाज बनना चाहता था। फेलोशिप ज्वाइंन करने के निर्णय से मेरे परिजन हैरान थे। मैं भी थोडा कंफ्यूज्ड था। मेरे प्रोफेसर कहा था, पत्रकारिता शुरू करने की कोई उम्र नहीं होती, फेलोशिप दोबारा नहीं मिलेगी। फेलोशिप ज्वाइंन करने के बाद जगह और काम के तरीक्रे बदल गए। फेलोशिप ने मेरे अधूरे पडे कामों को पूरे करने का अवसर दिया। यहां आने के बाद मैनें अपनी रुचि, क्षमता और पेशे को जोड कर सपने देखने शुरू कर दिया है। यहां बहुत कुछ है। फेलोशिप से जुडिए। कुमार गौरव, गांधी फेलोशिप

एक मिशन है फेलोशिप

हमारा उद्देश्य समाज में जागरुकता फैलाने का है, जिसके लिए हम युवाओं को फेलोशिप देते हैं। इस फेलोशिप में उनको किसी एक फील्ड में रिसर्च करना होता है जैसे कि टीबी एक गंभीर बीमारी है। हमारे देश में बडी संख्या में लोग इस बीमारी से पीडित हैं। हम अपने फेलोज को इस विषय पर रिसर्च पेश करने को कहते हैं। उनके रिसर्च से हमें पता चलता है कि इस बीमारी की हमारे पूरे देश में स्थिति क्या है। बेस्ट रिसर्चर को अवार्ड दिया जाता और उसके साथ उसके रिसर्च का खर्चा भी हमारी संस्था उठाती है। इस माध्यम के जरिए हम उन लोगों को आगे बढाना चाहते हैं जो समाज के कार्यों से जुडऩा चाहते हैं। फेलोशिप युवा वर्ग को करियर के नए नजरिये से जोडऩे का काम कर रही है। समाज की बुराइयों पर हर कोई प्रश्न करता है, पर बात जब पहल करने की होती है तो कुछ ही लोग हौसला दिख पाते हैं। इन्हीं कुछ लोगों के हौसले को हम फेलोशिप देते हैं और फेलोशिप का सपोर्ट ऐसे लोगों के सपनों को साकार करने का काम करता है। फेलोशिप से जुडिय़े समाज को बेहतर बनाने के लिए।

अनुपमा श्रीनिवासन, रीच लिली फाउंडेशन

फेलोशिप के फायदे

फेलोशिप आपके व्यक्तित्व को निखारने का भी काम करती है इसके जरिये आपको देश ही नहीं विदेश के भी प्रोफेशनल लोगों से मिलने का मौका मिलता है। कई सस्ंथाएं रिसर्च के लिए अच्छा स्टाइपेंड भी देती हैं और साथ में रहना-खाना भी उन्हीं के जिम्मे होता है। कला और साइंस क्षेत्र से जुडी फेलोशिप में देश-दुनिया को जानने का मौका मिलता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें न तो आपको घडी देखकर काम करना होता है ना ही कोई बॉस होता है। यहां पर तो बस अच्छा काम और स्पष्ट नजरिया ही आपको बुलंदियों पर ले जाने का काम करते हैं। फेलोशिप के अंतर्गत आपको प्रोफेशनल ट्रेनिंग भी दी जाती है।

वंदना यादव