जागरण संवाददाता, जयपुर : राजस्थान की महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं एवं बालिकाओं को दिए जा रहे निःशुल्क सेनेटरी नेपकिन के आकार में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस योजना के तहत सेनेटरी नेपकिन इस्तेमाल करने वाली बालिकाओं और महिलाओं से साइज के संबंध में जो सुझाव आएंगे, उन पर विशेषज्ञों और चिकित्सकों के साथ चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा ।

प्रश्नकाल में भाजपा विधायक राजेंद्र राठौड़ के सवाल के जवाब में भूपेश ने कहा कि नि:शुल्क सेनेटरी नेपकिन के लिए सरकार ने उड़ान योजना संचालित की है। यह प्रदेश में चरणबद्ध रूप में लागू की जा रही है। राजस्थान देश में पहला राज्य है जहां इतने बड़े पैमाने पर यह योजना चलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में 280 एमएम साइज के सेनेटरी नेपकिन वितरित कए जा रहे हैं।

उन्होंने बताा कि उड़ान योजना के तहत वर्तमान वित्तीय वर्ष में 200 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 33 जिलों में कुल 60 हजार 361 आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक करोड़ 15 लाख 26 हजार 50 लाभार्थियों एवं 34 हजार 104 राजकीय विद्यालयों पर 26 लाख 48 हजार 326 लाभार्थियों के लिए निःशुल्क सैनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने के आपूर्ति आदेश जारी कर विगत एक वर्ष में राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम लिमिटेड द्वारा जारी किए गए हैं। पिछले साल 104 करोड़ 78 लाख 79 हजार 368 रुपये खर्च किए गए थे।

राजस्थान सरकार नई खनन नीति बनाएगी

जागरण संवाददाता, जयपुर : राजस्थान सरकार नई खनन नीति बनाएगी । नई खनन नीति में आदिवासियों के उत्थान से जुड़े प्रावधान किए जाएंगे । खान मंत्री प्रमोद जैन ने शुक्रवार को विधानसभा में प्रश्नकाल में बताया कि 2019 से 2023 के बीच अधिसूचित क्षेत्र में 121 खनन पट्टे जारी किए गए जिसमें से 27 पट्टे आदिवासियों को आंवटित किए गए है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में आदिवासियों के लिए अधिसूचित क्षेत्र में अप्रधान खनिज नियमों के माध्यम से नीलामी पट्टों में स्थानीय लोगों को आरक्षण दिया जाता है। उन्होंने बताया कि इन्ही नियमों के तहत आदिवासियों को पंजीकृत सोसायटी में भी प्राथमिकता से खनन पट्टे आवंटित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रधान खनिज नियम के तहत खुली नीलामी के माध्यम से खनन आवंटन दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि यह प्रावधान है कि आदिवासी खनन पट्टे का एक साल तक स्थानान्तरण नहीं कर सकते। विधानसभा अध्यक्ष सी.पी.जोशी ने हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए कि पेशा एक्ट का अनुसरण करते हुए राज्य में आदिवासियों को अधिसूचित क्षेत्र में खनन पट्टे जारी करने चाहिए, जिससे उन्हें ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके।

Edited By: Vijay Kumar