कोटा, जागरण संवाददाता। राजस्थान के कोटा में पुलिस की जिला विशेष टीम व चिकित्सा विभाग की टीम ने सोमवार को दादाबाड़ी स्थित एक मकान में छापामार कार्रवाई करते हुए नकली घी बनाने का भंडाफोड़ किया है।पुलिस टीम ने छापा मारकर एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर 15 लाख रुपये कीमत का तीन हजार किलो नकली घी बरामद किया है।

जानकारी के अनुसार राजस्थान में पुलिस और चिकित्सा विभाग की टीम ने कोटा शहर के दादाबाड़ी इलाके में एक घर पर छापा मारकर नकली घी बनाने का भंडाफोड़ किया है। टीम ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर करीब 15 लाख  रुपए कीमत का तीन हजार किलो मिलावटी घी बरामद किया है।

जिला पुलिस अधीक्षक गौरव यादव ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि दादाबाड़ी के मकान नंबर 209 में बड़े पैमाने पर नकली घी बनाकर दीपावली पर खपाने की तैयारी की जा रही है। इस पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रवीण जैन के नेतृतव में विशेष टीम बनाई गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर छापा मारा। इस दौरान मकान में कई प्रचलित ब्रांड के पैकेज सहित घी बनाने की सामग्री मिली। पैकिंग का सामान मिला। पुलिस ने टोंक के दुनी निवासी राजू सोनी को मौके से गिरफ्तार किया है। दो लोग फरार हो गए। चिकित्सा विभाग ने घी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले अलवर में विभिन्न ब्रांडों के नाम से नकली घी बनाने का कारखाना पकड़ा था ।

जानकारी हो कि मिलावटखोरों के खिलाफ राजस्थान सरकार का "शुद्ध के लिए युद्ध अभियान" शुरु हुआ है। इसमें मिलावटी खाद्य सामग्री बनाने और बेचने वालों के खिलाफ सही सूचना देने वालों को 51 हजार का ईनाम दिया जाएगा। उनका नाम भी गोपनीय रखा जाएगा। इस अभियान की मॉनिटरिंग चिकित्सा विभाग करेगा। अभियान में दूध, मावा, पनीर, दूध उत्पाद, आटा, बेसन, खाद्य तेल एवं घी, सूखे मेवे, मसालों की जांच की जाएगी। अभियान के पहले ही दिन बीकानेर में 4 हजार पीपे नकली मावे के जब्त किये गए। यहां आटा और अरारोट मिलाकर नकली मावा बनाया गया था । जयपुर में भी कई दुकानों पर नमूने लिये गए ।

मिलावाट करने वालों को मिलेगी सजा

राज्य सरकार ने इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए एक कोर ग्रुप का गठन किया है। जिसमें गृह विभाग के प्रमुख शासन सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के शासन सचिव और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के शासन सचिव शामिल होंगे, जबकि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग समन्वयक की भूमिका निभाएगा। चिकित्सा विभाग ही इस ग्रुप का प्रशासनिक विभाग भी होगा। यह कोर ग्रुप जिला स्तर पर प्रबंधन समितियों एवं जिला कलक्टर से संपर्क कर अभियान की अवधि में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले थोक और खुदरा व्यापारियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करेगा। उनके खिलाफ लीगल एक्शन की मॉनिटरिंग करेग,जिससे मिलावटखोरों पर कार्रवाई कर सजा दिलवाई जा सके।

जानकारी के अनुसार इस अभियान में एक जांच दल बनाया गया है, जिसमें उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, विकास अधिकारी व अन्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी टीम लीडर व पुलिस उपाधीक्षक, पुलिस निरीक्षक, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, प्रवर्तन अधिकारी डेयरी का प्रतिनिधि सदस्य होंगे। यह टीम जिला कलेक्टर द्वारा निर्धारित संस्थाओं का निरीक्षण कर नमूने लिए जाएंगे और मौके पर ही नजदीकी टेस्टिंग लैब में नमूनों की जांच करवाएगी। सैंपल टेस्टिंग रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने पर मौके पर ही मिलावटी सामग्री नष्ट करवाई जाएगी।

मिलावटखोरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। जिला स्तरीय प्रबंधन समिति का गठन किया गया है। कमेटी के द्वारा जिले के ऐसे खाद्य पदार्थ उत्पादक बड़े थोक विक्रेता एवं खुदरा विक्रेता चिन्हित किए जाएंगे। जहां मिलावट की संभावना अधिक है। इस कमेटी में जिला कलक्टर अध्यक्ष होगा।

इसके अलावा जिला पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला रसद अधिकारी, प्रबंध निदेशक जिला डेयरी सदस्य होंगे। जबकि डिप्टी लीगल एडवाइजर, असिस्टेंट लीगल एडवाइजर और अतिरिक्त जिला कलेक्टर या समकक्ष अधिकारी संयोजक होंगे। समिति के द्वारा दैनिक आधार पर अभियान की समीक्षा कर जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी। 

त्‍योहारों में घी खरीदते समय ठीक से करें जांच 

त्‍योहारों का सीजन आते ही नकली घी का कारोबार तेज हो जाता ह‍ै। नकली देसी घी बनाने के बड़े कारखाने हैं अनुमान है कि दिल्ली एनसीआर में नकली घी की त्योहारी सीजन में ही एक हजार टन तक मांग रहती है।

बिकता है नकली देसी घी

दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों बाजारों से लेकर बस स्टेंड और रेलवे स्टेशन से लेकर सब्जी मंडियों तक नकली देसी घी की दुकानें सजी हैं। यह नकली देसी 120 रुपये प्रति किलोग्राम की दर तक भी बिकता है। पहले तो घी विक्रेता चीख-चीखकर ग्राहकों को असली घी (देसी घी) मात्र 120 रुपये किलोग्राम में का लालच देकर अपनी दुकान पर बुलाते थे। इतना ही नहीं तब ये घी विक्रेता यह भी दावा लिखकर रखते थे कि नकली साबित कर दे तो पांच हजार रुपये का नकद ईनाम। इस घी को इस तरह तैयार किया जाता था कि इसकी सुगंध से हर कोई इसे असली घी ही मानता था। अब नकली घी विक्रेताओं ने अपनी दुकान पर देसी घी लिखना बंद कर दिया है। वैसे यह नकली देसी घी वनस्पति घी में सुगंधित पदार्थ डालकर दोबारा गर्म करके बनाया जाता है।  

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