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    Rajasthan: कभी मैला ढोया, अपमान सहा और अब शान से जीवन गुजार रही उषा चौमर

    By Sachin Kumar MishraEdited By:
    Updated: Sun, 26 Jan 2020 04:29 PM (IST)

    Usha Chaumar. उषा चौमर ने मैला ढोने वाली अलवर की 157 महिलाओं का जीवन बदल दिया। उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। खुद अनपढ़ है लेकिन बेटी को स्नात्तक की परीक्षा दिलवा रही है।

    Rajasthan: कभी मैला ढोया, अपमान सहा और अब शान से जीवन गुजार रही उषा चौमर

    जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। Usha Chaumar. राजस्थान के अलवर शहर में कभी मैला ढोने वाली उष चौमर को पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने की जानकारी मिलते ही चारों तरफ उत्साह का माहौल है। कभी सिर पर मैला ढोने वाली उषा चौमर आज स्वच्छता मिशन में जाना पहचाना नाम है। स्वच्छता के लिए काम करने वाली उषा अमेरिका सहित पांच देशों की यात्रा कर चुकी हैं। साल, 2008 में उनके बनाए कपड़ों को ही पहनकर विदेशी मॉडल ने मिशन सेनिटेशन के तहत यूएन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कैट वॉक किया था। उषा चौमर को इस बात का फक्र है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर उन्हें राखी भी बांध चुकी हैं।

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    बेदह संघर्ष भरी है उषा चौमर की कहानी

    अलवर के हजूरी गेट निवासी उषा चौमर ने "दैनिक जागरण" को बताया कि मात्र 10 साल की उम्र में ही उसकी शादी हो गई थी। वह छोटी उम्र में मैला ढोने का काम करती थी। मैला ढोते समय प्रतिदिन गंदगी और बदतीर जीवन से रूबरू होना पड़ता था। घर में पानी का कनेक्शन नहीं था, तो करीब दो किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता था। मैला ढोते सम गर्मियों में प्यास लगने पर उन्हें दूर से ही पानी पिलाया जाता था। किसी को छूना अपराध माना जाता था। गलती से किसी को छूने पर धमकाया जाता था और बुरा-भला कह कर भगा दिया जाता था, लेकिन अब उसका जीवन बदल गया।

    उषा चौमर साल, 2003 में बिंदेश्वर पाठक की 'नई दिशा' संस्था से जुड़ी थी। संस्था से जुड़ने के बाद उसका जीवन पूरी तरह से बदल गया। स्वच्छता की मुहिम के तहत किए गए उनके कार्यों को आज देशभर में सराहा जा रहा है। उषा चौमर का कहना है कि 15 साल पहले और आज के जीवन में काफी अंतर आ गया। पहले वह अपने समाज की अन्य महिलाओं की तरह मैला ढोती थी, लेकिन अब इस काम को छोड़कर कर वे अचार और जूट के थैले बनाने तथा ब्यूटीशियन सहित अन्य कार्य करते हुए आत्मनिर्भर बन गई है। घर की आर्थिक स्थित में सुधार हुआ है। उषा चौमर वर्तमान में सुलभ इंटरनेशनल की अध्यक्ष है।

    157 महिलाओं का बदला जीवन 

    उषा चौमर ने मैला ढोने वाली अलवर की 157 महिलाओं का जीवन बदल दिया। उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। खुद अनपढ़ है, लेकिन बेटी को स्नात्तक की परीक्षा दिलवा रही है। उषा चौमर ने कहा कि महात्मा गांधी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरे बड़े नेता हैं, जिन्होंने खुद झाडू उठाकर देश में स्वच्छता का अभियान चलाया। वे मेरे आदर्श हैं। उषा चौमर कहती है कि मैंने गंदगी, बदबू और लानतभरी जिंदगी देखी है। उस समय वह जीना ही नहीं चाहती थी, लेकिन अब शान से जी रही हूं। पहले मंदिर में नहीं जा पाती थी, लेकिन अब प्रतिदिन पूजा करती हूं। अब तक अमेरिका और फ्रांस की यात्रा की है।

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