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    Rajasthan: मार्बल खानों पर काम करने वाले श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन व बीमा कराना होगा

    By Preeti jhaEdited By:
    Updated: Sun, 24 May 2020 01:38 PM (IST)

    मार्बल खानों पर काम करने वाले श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन व बीमा होगा नियमों के उल्लंघन पर खनन पट्टा निरस्त 2 माह बंद रहने के बाद एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी किशनगढ़ में काम शुरू

    Rajasthan: मार्बल खानों पर काम करने वाले श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन व बीमा कराना होगा

    जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान में खानों में काम करने वाले मजदूरों का श्रम विभाग में जिस्ट्रेशन और बीमा होना आवश्यक होगा। खानें तब ही चालू हो सकेगी जब वहां कार्यरत श्रमिक का श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन एवं मेडिकल क्लेम बीमा कराया हुआ हो।

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    प्रदेश के खान मंत्री प्रमोद जैन ने बताया कि बिना नियमों के खानों का संचालन हुआ तो मालिक के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 व राजस्थान महामारी रोग अध्यादेश-2020 के तहत कार्यवाही की जाएगी। खान पर काम करने वाले श्रमिकों को मास्क लगाना और बार-बार सेनेटाइजर अथवा साबुन से हाथ साफ करना आवश्यक होगा। सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेंन भी करना होगा। खान पर आने वाले प्रत्येक वाहन व मशीनों को सेनेटाइज करने व प्रत्येक बाहरी व्यक्ति की थर्मल स्क्रीनिंग करना आवश्यक होगा।

    उन्होंने बताया कि खानों पर थर्मल स्क्रीनिंग की मशीन खान पर आवश्यक रूप से रखनी होगी। खानों पर गैर जरूरी लोगों का प्रवेश बिल्कुल वर्जित होगा। खनन करते समय खान सुरक्षा नियमों की पालना भी सुनिश्चित करनी होगी। खनन कार्य के लिए तय की गाइडलाइन की पालना हो रही है या नहीं यह सुनिश्चित करने का काम क्षेत्रीय खान अभियंता का होगा। खान मंत्री ने बताया कि तय गाइडलाइन का उल्लंघन करने पर खनन पट्टा निरस्त किया जा सकेगा।

    दो माह से ठप्प पड़ा है खनन कार्य

    करीब दो माह तक बंद रहने के बाद एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी किशनगढ़ में पिछले एक सप्ताह से काम शुरू हुआ है। खान विभाग और व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि लॉकडाउन के कारण मॉर्बल व्यवसाय को करीब दो अरब का नुकसान हुआ है। किशनगढ़ के अलावा उदयपुर, बांसवाड़ा, अजीतगढ़, नीमकाथाना सहित एक दर्जन इलाकों में मार्बल की खानें हैं। वहीं कोटा संभाग में कोटा स्टोन की खान है।

    राज्य से मार्बल व कोटा स्टोन बड़ी मात्रा में नियमित रूप से एक्सपोर्ट होता है। लेकिन पिछले दो माह से खनन व्यवसाय पूरी तरह से ठप्प पड़ा है। सरकार ने खानों को चालू करने की अनुमति पिछले सप्ताह दे दी, लेकिन अन्य राज्यों के मजदूरों के अपने घर जाने से खनन कार्य सही ढंग से शुरू नहीं हो सका है