उदयपुर, संवाद सूत्र। कोरोना महामारी से लोग पहले से ही लोग परेशान हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच उदयपुर संभाग में ब्लैक फंगस यानी ‘म्यूकॉरमाइटिसीस’ ने भी दस्तक दे दी है। उदयपुर संभाग में अब तक सता पोस्ट कोविड मरीजों को इस बीमारी ने चपेट में लिया है। इससे बचाव के आरएनटी मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ टीम जुटी हुई है। उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज में महज 11 इंजेक्शन ही मौजूद हैं और इस तरह के और भी मरीज आने की आशंका से सौ इंजेक्शन मंगवाए जा रहे हैं।

आरएनटी मेडिकल कॉलेज के महाराणा भूपाल चिकित्सालय के ईएनटी विभाग में फिलहाल ब्लैक फंगस रोग से पीड़ित सात मरीज भर्ती हैं। जिनका उपचार विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत माथुर के निर्देशन में किया जा रहा है। इन मरीजों में संभाग के छह मरीजों के अलावा भीलवाड़ा का भी एक मरीज शामिल है। ईएनटी विभाग के प्रभारी विशेषज्ञ डॉ. माथुर का कहना है कि ब्लैक फंगस रोग आंखों के अलावा जबड़े को भी प्रभावित करता है। सही समय पर इसका उपचार नहीं किया जाए तो आंखों की रोशनी चली जाती है तथा जबड़ा भी खराब हो जाता है। वह बताते हैं कि यह रोग मस्तिष्क तक पहुंचा जाए तो उसका बचाव संभव नहीं रहता।

उदयपुर के महाराणा भूपाल अस्पताल में भर्ती सात रोगियों में एक रोगी की दोनों आंखों की रोशनी जा चुकी है, जबकि एक रोगी की एक आंख को बचाने के लिए प्रयासरत हैं। इसके बचाव के लिए जिस इंजेक्शन को उपयोग में लिया जाता है वह सीमित संख्या में उपलब्ध हैं। सात रोगियों को इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महज चार इंजेक्शन भी शेष बचे हैं। इनकी उपलब्धता को लेकर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से आग्रह किया गया है।

वह बताते हैं कि पोस्ट कोविड मरीजों में इस रोग के फैलने की आशंका रहती है। इधर, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. लाखन पोसवाल का कहना है कि कोरोना पीड़ितों के स्वस्थ्य होने के बाद ब्लैक फंगस के केस आने लगे हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए अधिक मात्रा में स्टेरॉयड दिए जाने से ब्लैक फंगस होने का खतरा बना रहता है। इसके बचाव के लिए सौ इंजेक्शन के लिए आॅर्डर दिया गया है। अगले दो-तीन दिन में उनकी उपलब्धता हो जाएगी। प्रारंभिक स्टेज में यदि मरीज को यह इंजेक्शन लगा दिया जाए तो उसके स्वस्थ्य होने की संभावना अधिक रहती है।

वह बताते हैं कि कोरोना संक्रमित मरीज इस रोग से बचाव को लेकर ज्यादा सतर्क रहें। शरीर में होने वाले किसी घाव के उपचार को लेकर लापरवाही नहीं बरतें। हवा में मौजूद फंगस ऐसे रोगी को नुकसान पहुंचा सकता है। वह बताते हैं कि नाक से काला पानी या खून बहने के बाद बुखार आना, सिरदर्द, आंखों का सूजना, नाक की चमड़ी का काला पड़ने के अलावा खांसी के साथ खून आना और दांतों के एकाएक हिलने जैसी स्थिति इसके लक्षण होते हैं। 

Edited By: Priti Jha