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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 02, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Rajasthan: गुर्जर सहित पांच जातियों को न्यायिक सेवा में पांच फीसदी आरक्षण

By Sachin Kumar MishraEdited By:
Published: Sun, 02 Aug 2020 08:37 PM (IST)Updated: Sun, 02 Aug 2020 11:00 PM (IST)

Reservation In Judicial Service राजस्थान में गुर्जर समाज सहित अति पिछड़ा वर्ग में शामिल पांच जातियों के युवाओं को राजस्थान न्यायिक सेवा में पांच फीसदी आरक्षण मिलेगा।

Rajasthan: गुर्जर सहित पांच जातियों को न्यायिक सेवा में पांच फीसदी आरक्षण
Rajasthan: गुर्जर सहित पांच जातियों को न्यायिक सेवा में पांच फीसदी आरक्षण

जागरण संवाददाता, जयपुर। Reservation In Judicial Service: राजस्थान सरकार ने गुर्जर समाज सहित अति पिछड़ा वर्ग में शामिल पांच जातियों के युवाओं को राजस्थान न्यायिक सेवा में एक प्रतिशत के स्थान पर पांच प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया है। इसके लिए राज्य मंत्रिमंडल ने राजस्थान न्यायिक सेवा नियम 2010 में संशोधन को मंजूरी दी है। अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यार्थियों को इस संशोधन के जरिए राजस्थान न्यायिक सेवा में पहले से अधिक संख्या में आगे आने का मौका मिलेगा। इस निर्णय से गुर्जरों के साथ ही रैबारी-रायका, गाड़िया लुहार, बंजारा व गड़रिया समाज के लोगों को फायदा होगा। राज्य न्यायिक सेवा में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिल रहा है।

इस तरह प्रदेश में अब न्यायिक सेवा में कुल 55 प्रतिशत आरक्षण हो गया। राज्य की सभी सरकारी सेवाओं में गुर्जर सहित पांच जातियों को अति पिछड़ा वर्ग में पांच प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। रविवार को अति पिछड़ा वर्ग की पांच जातियों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है । प्रदेश में गुर्जर समाज के बड़े नेता माने जाने वाले सचिन पायलट द्वारा सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत करने के बाद गुर्जरों में सरकार को लेकर नाराजगी बढ़ रही थी। इसी नाराजगी को कम करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। आगामी दिनों में गुर्जर समाज को खुश करने के लिए कुछ और निर्णय लिए जा सकते हैं।

पायलट द्वारा गहलोत के खिलाफ बगावत करने के बाद गुर्जर समाज के लोगों ने कुछ स्थानों पर सीएम के खिलाफ एकत्रित होकर नारेबाजी की थी। तीन-चार स्थानों पर सीएम के पुतले भी जलाए गए थे। उल्लेखनीय है कि साल 2007 से 2009 तक हुए हिंसक गुर्जर आरक्षण आंदोलन में 68 लोगों की मौत हुई थी, सरकारी संपतियों का भी काफी नुकसान हुआ था। इसके बाद वसुंधरा सरकार ने गुर्जर समाज को अति पिछड़ा वर्ग में आरक्षण दिया था, जिस पर 2011 में हाईकोर्ट से रोक लग गई थी। इसके बाद फिर आंदोलन शुरू हुआ 2019 में अशोक गहलोत सरकार ने विधानसभा में विधेयक पारित करा कर गुर्जर सहित पांच जातियों को अति पिछड़ा वर्ग में आरक्षण दिया। विधानसभा में एक संकल्प पारित करा कर केंद्र सरकार को भेजकर इसके संविधान की नौवीं अनुसूची में डलवाने का आग्रह किया।