जयपुर, जागरण संवाददाता। Crude Oil. राजस्थान के रेतीले धोरों के नीचे एक बार कच्चे तेल के रूप में काला सोना निकलेगा। बाड़मेर के रेतीले धोरों में निकल रहे कच्चे तेल ने जहां प्रदेश की तकदीर बदलने का काम किया, वहीं अब बीकानेर जिले के सियासर ब्लॉक में तेल और गैस की खोज का काम शुरू किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल लिमिटेड ने करीब डेढ़ हजार ग्राउंड लाइन किलोमीटर में टू-डी सिस्मिक सर्वे का काम शुरू किया है। यह काम करीब एक साल में पूरा होने की उम्मीद है। ऑयल इंडिया जैसलमेर के साउथ बाधेवाला ब्लॉक में भी तेज की खोज का काम अगले कुछ दिनों में शुरू करेगी।

बीकानेर के सियासर ब्लॉक और जैसलमेर के बाधेवाला ब्लॉक में कच्चे तेल की खोज के लिए कंपनी ने सरकार के साथ पिछले साल रेवेन्यू शेयरिंग अनुबंध किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने कंपनी को तीन साल के लिए पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन लाइसेंस जारी किया था।

जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने करीब दो साल पहले ऑन एरिया लाइसेंस पॉलिसी शुरू की थी। इसके तहत ऑयल इंडिया को देश के 21 बॉक्स में तेल और गैस की खोज का लाइसेंस दिया गया है। इनमें तीन ब्लॉक्स राजस्थान के है।

केंद्र और राज्य दोनों की आय बढ़ी

उधर, बाड़मेर में प्रतिदिन 1.75 बैरल क्रूड ऑयल का उत्पादन हो रहा है। इससे राज्य सरकार को 15 और केंद्र सरकार को 32 करोड़ रुपये प्रतिदिन मिल रहे हैं। बाड़मेर में हो रहे क्रूड ऑयल के उत्पादन से अब तक एक लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिल चुका है। इसमें 65 लाख करोड़ केंद्र और करीब 35 लाख करोड़ राज्य सरकार को मिले हैं। बाड़मेर में तेल की खोज में जुटी केयर्न एनर्जी ने 6500 वर्ग किलोमीटर इलाके में 11 नए ब्लॉक्स की खोज शुरू कर दी है।

राज्य के खान एवं पेट्रोलियम मंत्री प्रमोद जैन का कहना है कि रेगिस्तानी इलाकों में तेल के उत्पादन से प्रदेश और देश को राजस्व मिलने के साथ ही लोगों को रोजगार के अवसर बढ़े हैं। राज्य सरकार निरंतर तेल और गैस की खोज के लिए कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि अब जालौर में भी तेल के भंडार होने की जानकारी मिली है, वहां भी खोज का काम शीघ्र शुरू किया जाएगा।

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Posted By: Sachin Mishra

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