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राजस्थान: बाड़मेर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग करने वाले 79 एमबीबीएस छात्रों पर गिरी गाज, 13 को हॉस्टल से निकाला

Published: Mon, 02 Nov 2026 11:37 AM (IST)

राजस्थान के बाड़मेर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के आरोप में 79 एमबीबीएस छात्रों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

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संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, जयपुर। राजस्थान के राजकीय मेडिकल कॉलेज, बाड़मेर ने फ्रेशर्स छात्रों की रैगिंग के गंभीर आरोपों के बाद 79 एमबीबीएस छात्रों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। आरोप है कि 2025 बैच के सीनियर छात्रों ने जूनियर्स के साथ अपमानजनक व्यवहार किया।

उन पर छोटे बाल रखने, फॉर्मल कपड़े पहनने और सीनियर्स को एक तय लहजे में संबोधित करने का दबाव बनाया। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, सीनियर्स ने ये निर्देश वाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए दिए थे।

कैसे सामने आया रैगिंग का मामला?

यह पूरा मामला तब खुला जब कॉलेज के फैकल्टी सदस्यों ने देखा कि कई जूनियर छात्रों ने अपने बाल बहुत छोटे करा रखे हैं। जब कॉलेज प्रशासन ने इन छात्रों से गोपनीय रूप से बातचीत की, तो उन्होंने खुलासा किया कि सीनियर्स के दबाव और निर्देशों के कारण उन्हें अपने बाल कटवाने पड़े थे।

इसके अलावा, प्रशासन को बाड़मेर शहर के एक सैलून से छात्रों के बाल कटवाने के वीडियो फुटेज भी मिले, जिसके बाद एंटी-रैगिंग कमेटी ने जांच शुरू की।

किसको क्या मिली सजा?

जांच में छात्रों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर सीनियर छात्रों की संलिप्तता तय की गई और अलग-अलग स्तर पर सजा सुनाई गई है।

सबसे गंभीर संलिप्तता पाए जाने वाले 13 छात्रों को हॉस्टल से स्थायी रूप से निष्कासित कर दिया गया है। साथ ही, इन्हें 30 से 60 कार्यदिवसों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित किया गया है, यानी ये छात्र लेक्चर, प्रैक्टिकल, वार्ड पोस्टिंग और परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सकेंगे।

अन्य 11 छात्रों को 30 कार्यदिवसों के लिए हॉस्टल से निकाला गया है और 15 दिनों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से रोका गया है। इन सभी 24 छात्रों के एक साल तक किसी भी सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधि में हिस्सा लेने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

कई छात्रों को दी गई सख्त चेतावनी

कार्रवाई के दायरे में आए अन्य 50 छात्रों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की रैगिंग या अनुशासनहीनता में शामिल होने पर उन्हें हॉस्टल से हमेशा के लिए निकाल दिया जाएगा।

इन 50 छात्रों को 7 कार्यदिवसों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों और एक साल के लिए खेल व सांस्कृतिक आयोजनों से निलंबित किया गया है। वहीं, पांच अन्य छात्रों को चेतावनी जारी करते हुए निर्देश दिया गया है कि वे तीन दिनों के भीतर अपने माता-पिता को कॉलेज प्रशासन के सामने उपस्थित कराएं।

रैगिंग को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनूप गुर्जर ने स्पष्ट किया कि संस्थान छात्रों के साथ रैगिंग, अनुशासनहीनता और दुर्व्यवहार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर छात्रों के साथ ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बाड़मेर का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को राजस्थान के 12 अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों से प्रथम वर्ष के छात्रों के उत्पीड़न और रैगिंग की शिकायतें मिली हैं।

एनएमसी ने सभी संस्थानों को एंटी-रैगिंग नियमों के तहत निष्पक्ष जांच करने, सबूत सुरक्षित रखने और नए छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

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