उदयपुर, संवाद सूत्र। एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील शुक्रवार को ओवरफ्लो हो गई। जिसका लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। आजादी के बाद इन 75 सालों में यह दसवां मौका है, जब जयसमंद झील छलकी है। अच्छे मानसून के चलते उदयपुर संभाग के सभी छोटे-बड़े बांध और झीलें पहले ही छलक चुके हैं।

उदयपुर जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर सलूम्बर मार्ग स्थित जयसमंद झील 90 किलोमीटर वर्ग क्षेत्रफल में फैली है। साढ़े सत्ताइस फीट भराव क्षमता वाली जयसमंद झील शुक्रवार लगभग चार बजे छलक उठी। हालांकि लगातार बनी पानी की आवक से पिछले तीन दिन से उसके छलकने का इंतजार किया जा रहा था। वर्ष 1947 के बाद इस झील को दसवीं बार छलकते हुए देखने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़ गए। इससे पहले जयसमंद दो वर्ष पूर्व छलकी थी।

जयसमंद पाल पर बने हाथी के पैरों तक पानी यानी झील लबालब

जयसमंद की पाल पर तत्कालीन महाराणा जयसिंह ने मार्बल से विशाल हाथी बनवाए थे। जिनके पांव तक पानी चढ़ने का मतलब इस बात का संकेत है कि झील लबालब होने वाली है। हालांकि इससे पहले हाथियों की सूंड तक पानी आने पर ही झील लबालब होती थी लेकिन सत्तर के दशक में भारी पानी आने पर आसपास के कई गांव डूब गए थे और झील का ओवरफ्लो लगभग सात फीट कम कर दिया था।

9 नदी और 99 नाले गिरते हैं जयसमंद में

जयसमंद झील में 9 नदी और 99 नाले गिरते हैं। जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता निर्मल मेघवाल बताते हैं कि इसकी कुल भराव क्षमता 14 हजार एफसीएफटी है। भराव क्षमता व क्षेत्रफल की दृष्टि से काफी बड़ी होने के कारण इसे लबालब होने में समय लगता है। जयसमंद के कैचमेंट क्षेत्र में कई बड़े एनिकट हैं जिनके भरने के बाद झील में पानी पहुंचना शुरू होता है। उदयपुर जिले में अभी तक 804 मिमी बारिश हो चुकी है। अच्छी बारिश के चलते मानसून के छठवें दौर तक शहर की प्रमुख फतहसागर, पिछोला, स्वरूपसागर आदि झीलें छलक चुकी हैं। जिले के 51 में 45 बांध और जलाशय लबालब हो चुके हैं।

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Edited By: Ashisha Singh Rajput