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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 25, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पराली जलाने से कम होती धरती की उपजाऊ शक्ति

By JagranEdited By:
Published: Sat, 25 Sep 2021 04:55 PM (IST)

सबसे अधिक पराली जलाने वाले गांवों को इस बार पराली दहन से रोकने के लिए डिप्टी कमिश्नर मालेरकोटला ने कमर कस ली है।

पराली जलाने से कम होती धरती की उपजाऊ शक्ति
पराली जलाने से कम होती धरती की उपजाऊ शक्ति

संवाद सहयोगी, मालेरकोटला :

गत वर्ष धान के सीजन दौरान सबसे अधिक पराली जलाने वाले गांवों को इस बार पराली दहन से रोकने के लिए डिप्टी कमिश्नर मालेरकोटला ने कमर कस ली है। डीसी अमृत कौर गिल द्वारा गांव कुठाला, मिट्ठेवाल, दसोधा सिंह वाला व झुनेर के किसानों से नुक्कड़ बैठक कर पराली न जलाने संबंधी जागरूक किया। गांव कुठाला की कोआपरेटिव सोसायटी, मिट्ठेवाल के पार्क, दसोधा सिंह वाला व झुनेर के गुरुद्वारा साहिब में किसानों को संबोधित करते डिप्टी कमिश्नर अमृत कौर गिल ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण में प्रदूषण फैलता है। दूसरा धरती की उपजाऊ शक्ति कम होती है, जिससे किसान को खाद व कीटनाशकों का इस्तेमाल अधिक करना पड़ता है। ऐसे में खेतीबाड़ी व किसान भलाई विभाग के सहयोग से गांव में जाकर किसानों को पराली न जलाने संबंधी जागरूक किया जा रहा है। मौजूद अफसरों, गांव निवासियों, किसानों व नौजवानों को लोक लहर पैदा करने को प्रेरित किया। जो किसानों को पराली जलाने के नुकसान व खाद के रूप में इस्तेमाल करने के फायदे बताएगी।

किसान आई खेत एप से घर बैठे मंगवा सकते हैं मशीनरी

डीसी ने बताया कि किसानों को मशीनरी आसान तरीके से उपलब्ध करवाने के मकसद से आई खेत एप की शुरुआत की है। इसके जरिए किसान चेक कर घर बैठे मशीन बुक करवा सकता है। उसे कार्यालयों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एप पर संपर्क नंबर से किसानों को सहकारी सभाओं व पंचायतों के बारे में अहम जानकारी हासिल होगी। उक्त लोगों से संपर्क कर किसान मशीनरी बुक करवा सकेगा।

जरूरत के अनुसार करें कीटनाशक और खाद का प्रयोग

खेतीबाड़ी विकास अफसर कुलबीर सिंह ने बताया कि जिले में पराली प्रबंधन हेतु किसान, किसान ग्रुप, ग्राम पंचायतों व सहकारी सभाओं को सब्सिडी पर उपकरण जारी किए गए हैं। इसके अलावा खेतीबाड़ी विभाग द्वारा खेती विभिन्नता अपनाने, पानी की संयम से प्रयोग, खाद व फर्टिलाइजर तथा कीटनाशकों को सही तरीके से इस्तेमाल करने संबंधी जानकारी दी जा रही है।

पराली के धुएं से फैलती हैं कई तरह की बीमारियां

कार्यकारी इंजीनियर पंजाब प्रदूषण बोर्ड राजीव गुप्ता ने पराली जलने से पर्यावरण को हो रहे नुकसान व सेहत को लग रही बीमारियों के बारे में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पराली के धुएं से कई तरह की बीमारियां फैलती हैं। इस मौके सहायक रजिस्ट्रार सहकारी सभाएं संदीप कौर, ब्लॉक तकनीकी मैनेजर अहमदगढ़ मोहम्मद जमील, खेतीबाड़ी विकास अफसर राजेश कुमार, अनमोलदीप सिंह, खेतीबाड़ी सब इंस्पेक्टर गोपाल कृष्ण आदि उपस्थित थे।