संगरूर, जेएनएन। बीस साल पुरानी खटारा स्कूल वैन ने चार मासूम बच्चों की जान ले ली। हादसा कस्बा लोंगोवाल के गुरुद्वारा सिद्ध समाधां साहिब के पास हुआ। सिमरन पब्लिक प्राइवेट स्कूल की वैन में आग लगने से तीन बच्चियों व एक बच्चे जिंदा जल गए। चारों बच्‍चों को बेहद गमगीन माहौल में रविवार सुबह अंतिम संसकार किया गया।

रविवार सुबह चारों बच्चों का रामबाग लोंगोवाल में एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान एसजीपीसी प्रधान गोबिंद सिंह लोंगोवाल सहित काफी संख्‍या में लोग मौजूद थे। बच्‍चों को अंतिम विदाई देने पूरा गांव उमड़ पड़ा। बच्चों की मौत के शोक में लोंगोवाल के बाजार बंद रहे।

दूसरी ओर, हादसे के बाद पुलिस द्वारा तुरंत हिरासत में लिए गए स्कूल के अध्यापक व अन्य स्टाफ के करीब आठ लोगों को रिहा कर दिया गया है। स्कूल का मालिक लखविंदर सिंह लक्की व ड्राइवर दलवीर सिंह को पुलिस ने शनिवार को ही संगरूर के सिविल अस्पताल से हिरासत में ले लिया गया था।

जानकारी के अनुसार, वैन में आग इसके पेट्रोल टंकी में लीक के कारण लगी। स्‍कूल वैन में सुरक्षा के किसी तरह के नियम का पालन नहीं किया जा जा रहा था और यही कारण था कि यह पल भर में तंदूर में तब्‍दली हाे गई। चार स्‍कूली बच्चे इस कदर जिंदा जल गए कि उनकी पहचान बहुत मुश्किल हो गई।

स्कूल से निकलते ही 500 मीटर दूर हुआ हादसा, आग लगने से धमाका

इस मारुति वैन में 12 बच्चों सहित वैन चालक व हेल्पर मौजूद थे। इसे स्कूल ने कंडम हालत में कुछ समय पहले ही खरीदा था।  वैन स्कूल से बच्चों घर छोडऩे के लिए लोंगोवाल की तरफ निकली तो आधा किलोमीटर दूर ही इमसें आग लग गई। थोड़ी ही देर में धमाके के साथ आग और भड़क उठी। आठ बच्चों को राहगीरों ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। चार बच्चे बीच में ही फंसे रह गए और उनकी मौत हो गई। सभी लोंगोवाल गांव के रहने वाले थे और गरीब परिवारों से थे। वैन की एक खिड़की भी जाम थी, जिस कारण उन चारों बच्चों को नहीं निकाला जा सका। बाकी आठ बच्चों को लोंगोवाल के पास निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। उनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है।

एसएसपी डॉ. संदीप गर्ग ने स्कूल मालिक व प्रिंसिपल लखविंदर सिंह लक्की व वैन चालक दलवीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला के आदेश के बाद स्कूल प्रबंधन पर धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) का मामला दर्ज कर लिया गया है।

पीडि़त परिवारों को साढ़े सात लाख, सभी स्कूल बसों की जांच के आदेश

मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने पीडि़त परिवारों को साढ़े सात लाख रुपये प्रति परिवार देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने ट्रांसपोर्ट विभाग से प्रदेश के सभी स्कूल बसों की जांच करने व स्कूली बच्चों की सुरक्षा यकीनी बनाने के निर्देश दिए।

भगवंत मान व अमन अरोड़ा लोगों के साथ धरने पर बैठे

हादसे से गुस्साए लोगों ने जाम लगा दिया। वे प्रिंसिपल व ड्राइवर को पकड़ने की मांग पर अड़े रहे। स्कूल को आग लगाने की धमकी भी दी। आप के सांसद भगवंत मान व आप विधायक अमन अरोड़ा भी मौके पर पहुंचे और लोगों के साथ धरने पर बैठ गए। गिरफ्तारी के बाद लोगों ने धरना उठा दिया।

इन बच्चों की गई जान

-सिमरजीत सिंह पुत्र कुलवंत सिंह, नर्सरी कक्षा

-सुखजीत कौर पुत्री जगसीर सिंह, यूकेजी कक्षा

-नवजोत कौर पुत्री जसवीर सिंह, यूकेजी कक्षा

-राध्या पुत्री सतपाल सिंह, प्री-नर्सरी कक्षा

आंखों देखी: गुरमुख सिंह-

पेट्रोल लीक होते देख ड्राइवर को रोका, हर तरफ धुंआ था, सिर्फ चीखें सुनाई दे रही थीं

मारुति वैन के पास से ट्रैक्टर पर जा रहे गुरमुख सिंह निवासी केहर सिंह वाला ने बताया कि जैसे ही उन्होंने मारुति वैन में आग लगी देखी तो तुरंत ड्राइवर को गाड़ी रोकने के लिए कहा, लेकिन वह समझ नहीं पाया। दोबारा कहने पर वैन रोकी। ड्राइवर व उसका सहायक गाड़ी से बाहर निकले। इतनी देर में आग लग गई और गाड़ी को आग ने घेर लिया। पांच-छह नौजवानों ने मिलकर साथ लगते खेत गीली मिट्टी गाड़ी में डाली। गाड़ी की एक तरफ की खिड़की खुल गई, जिसमें बच्चों को बाहर निकाल लिया गया। धुआं अधिक होने के कारण पता नहीं चल पा रहा था कि गाड़ी में कितने बच्चे सवार हैं। केवल चीखें सुनाई दे रही थीं। जब तक आग पर काबू पाया, तब तक चार बच्चे जिंदा जल चुके थे। फायरब्रिगेड व पुलिस काफी देरी के बाद मौके पर पहुंचे।

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 सड़क सुरक्षा के 22 में से कोई भी नियम पूरा नहीं करती थी स्कूल वैन

जिम्मेवार कौन?

-ड्राइवर: आग लगने पर बच्चों को बचाने की बजाय जलती वैन छोड़कर फरार हो गया। क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए गए।

-स्कूल प्रबंधन: बीस साल से अधिक पुरानी वैन का इस्तेमाल बच्चों को ले जाने व छोडऩे के लिए हुआ। पता था कि वैन कंडम हैं, उसके बावजूद खरीदी। वैन की रजिस्ट्रेशन तक नहीं।

-जिला शिक्षा अधिकारी : स्कूल में पुरानी वैन चल रही थी। कार्रवाई तो क्या करनी थी कभी चेकिंग भी नहीं की गई। नतीजा आपके सामने है।

-प्रिंसिपल : प्रिंसिपल भी मौके से भाग गया। बच्चों की जान जोखिम में डालने के कैसे अनुमति देते रहे। कभी विरोध क्यों नहीं किया।

-डीसी : डीसी की अध्यक्षता में बनी मॉनीटङ्क्षरग कमेटी ने भी इस बात की जांच नहीं की थी कि वैन बीस साल पुरानी है। वैन सड़क सुरक्षा के 22 में से कोई भी नियम पूरा नहीं करती थी।

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स्कूल बसों के लिए ये हैं नियम, जिनको मानना सबके लिए जरूरी। अगर आपका स्कूल प्रबंधन इनको नहीं मानते तो आवाज उठाएं।

-फर्स्‍ट एड बॉक्स का होना।

-फायर सेफ्टी यंत्र का होना।

-बस का कलर पीले रंग का होना

-बस का फिटनेस, प्रदूषण सर्टिफिकेट और बीमा सर्टिफिकेट होना चाहिए।

-वाहन पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अंकित होना

-वाहन में कैमरा होना। महिला अटेंडेंट का होना।

-स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर होना

-वाहन पर स्कूल का नाम, बस के मालिक का नाम, फोन नंबर अंकित होना

-ड्राइवर को पांच साल के वाहन चलाने का अनुभव होना

-ड्राइवर के साथ कोई बच्चा नहीं बैठा होना चाहिए।

-वाहन परमिट का होना

-जीपीएस सिस्टम होना

-चालक परिचालक का ड्रेस में होना

-बसों की खिड़कियों पर जाली लगी हो, ताकि वे बाहर की तरफ न लटकें।

(इनमें से एक भी नियम यह वैन पूरा नहीं करती थी)

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विद्यार्थियों के साथ पहले भी हुए दर्दनाक हादसे

अमृतसर-

अगस्त 2016:  गांव माहवा में स्कूल बस संकरी पुली से गंदे नाले में गिर गई थी। हादसे में सात मासूमों की मौत हो गई थी और 13 बच्चे जख्मी हुए थे।

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बठिंडा-

-नवंबर 2017: बठिंडा-रामपुरा फूल नेशनल हाईवे पर अनियंत्रित तेज रफ्तार ट्रक ने नौ छात्रों समेत दस लोगों को कुचल दिया था। उनकी घटनास्थल पर मौत हो गई थी। हादसे में 24 अन्य घायल हो गए थे।

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मोगा-

-5 दिसंबर, 2109:  मोगा में एक निजी स्कूल वैन हादसे का शिकार हो गई, जिसमें 8 बच्चे घायल हो गए। घायलों को सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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