सतलुज किनारे महाराजा रणजीत सिंह की कूटनीति को मिलेगी पहचान! राज्यसभा में उठी रूपनगर में स्मारक की मांग
राज्यसभा में सांसद सतनाम सिंह संधू ने रोपड़ में महाराजा रणजीत सिंह से जुड़े ऐतिहासिक स्थल पर विरासत स्मारक बनाने की मांग उठाई।
HighLights
सांसद सतनाम संधू ने राज्यसभा में स्मारक की मांग की।
महाराजा रणजीत सिंह की 1831 की ऐतिहासिक मुलाकात का स्थल।
विरासत पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और इतिहास संरक्षित होगा।
जागरण संवाददाता, मोहाली। रोपड़ में सतलुज नदी के किनारे स्थित महाराजा रणजीत सिंह से जुड़े ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित करने की मांग राज्यसभा में उठी है। सांसद सतनाम सिंह संधू ने शून्यकाल के दौरान केंद्र सरकार से इस स्थान पर महाराजा रणजीत सिंह कूटनीतिक विरासत स्मारक स्थापित करने की मांग की।
उनका कहना है कि स्मारक बनने से ऐतिहासिक स्थल को नई पहचान मिलेगी और क्षेत्र में विरासती पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। सांसद संधू ने सदन में बताया कि इसी स्थान पर 26 अक्टूबर 1831 को महाराजा रणजीत सिंह और तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिंक के बीच ऐतिहासिक कूटनीतिक मुलाकात हुई थी।
उन्होंने इस मुलाकात को भारत के कूटनीतिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटना बताते हुए इसके स्थल के संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया।
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संग्रहालय और डिजिटल गैलरी बनाने का सुझाव
सतनाम सिंह संधू ने प्रस्तावित स्मारक में संग्रहालय, दस्तावेजी गैलरी और डिजिटल प्रस्तुतियां शामिल करने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि इन माध्यमों से 1831 की मुलाकात के साथ महाराजा रणजीत सिंह की कूटनीति, प्रशासन और सैन्य क्षमता के बारे में नई पीढ़ी को जानकारी दी जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह ने करीब 38 वर्षों के शासनकाल में मजबूत राज्य की स्थापना की। इसके साथ ही उन्होंने भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। संधू ने श्री हरमंदिर साहिब सहित कई ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की सेवा का उल्लेख भी किया।
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चोरी हो चुका है स्मृति ध्वज-स्तंभ
सांसद ने रोपड़ स्थित ऐतिहासिक स्थल पर लगाए गए सरकार-ए-खालसा स्मृति ध्वज-स्तंभ के चोरी होने का मुद्दा भी सदन में उठाया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक ध्वज-स्तंभ का पता नहीं चल पाया है।
संधू ने कहा कि ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है। स्मारक बनने से युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलेगा और रोपड़ को विरासती पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
