धान कटते ही सुलगने लगा पंजाब! पराली जलाने के मामलों ने पार किया पिछला रिकॉर्ड, अमृतसर-तरनतारन में हालात खराब
पंजाब में पराली जलाने के मामले बढ़कर 118 हुए, जो पिछले साल से अधिक हैं। अमृतसर और तरनतारन सबसे आगे ...और पढ़ें

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
पंजाब में पराली जलाने के मामले 118 तक पहुंचे।
पिछले वर्ष के 116 मामलों का रिकॉर्ड टूटा।
अमृतसर, तरनतारन में सर्वाधिक पराली जलाने की घटनाएं।
जागरण संवाददाता, पटियाला। पंजाब में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की घटनाओं ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। सीजन के शुरुआती दिनों में पराली जलाने के मामलों में करीब 60 प्रतिशत की कमी से राहत महसूस कर रहे प्रशासन के सामने अब नई चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य में पराली जलाने के मामले बढ़कर 118 तक पहुंच गए हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 116 मामले सामने आए थे।
यानी इस बार घटनाओं का आंकड़ा पिछले वर्ष के स्तर को भी पार कर गया है। शुरुआती दौर में मिली राहत के बाद तेजी से बढ़े मामलों ने सरकार और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सबसे अधिक 60 मामले अमृतसर जिले में सामने आए हैं, जबकि तरनतारन 36 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। इन दोनों जिलों में सामने आई घटनाएं राज्य में पराली जलाने के कुल मामलों का बड़ा हिस्सा हैं।
अन्य जिलों में भी आग लगाने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। प्रशासन की ओर से निगरानी, जागरूकता और कार्रवाई के जरिए किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, लेकिन बढ़ते आंकड़े बताते हैं कि खेतों में आग लगाने की चुनौती अभी बरकरार है।
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25 सितंबर तक हालात थे नियंत्रित
पराली जलाने के मामलों के शुरुआती आंकड़े इस बार राहत देने वाले थे। 25 सितंबर तक राज्य में पराली जलाने की केवल 32 घटनाएं सामने आई थीं, जबकि पिछले वर्ष 25 सितंबर 2025 तक यह संख्या 79 थी।
इस तरह शुरुआती अवधि में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इससे उम्मीद जगी थी कि जागरूकता अभियान, प्रशासनिक निगरानी और पराली प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों से इस सीजन में आग लगाने की घटनाओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
हालांकि, धान की कटाई तेज होने के साथ ही स्थिति बदलने लगी। कुछ ही समय में मामलों की संख्या बढ़कर 118 तक पहुंच गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में 116 मामले दर्ज किए गए थे। शुरुआती दिनों में मिली बढ़त अब समाप्त हो चुकी है और इस वर्ष के मामले पिछले साल के आंकड़े से आगे निकल गए हैं। यह बदलाव संकेत देता है कि कटाई का दायरा बढ़ने के साथ खेतों में पराली के निपटारे की चुनौती भी गंभीर हो रही है।
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अमृतसर और तरनतारन में सबसे ज्यादा घटनाएं
राज्य में सामने आए मामलों का जिलेवार ब्योरा देखें तो अमृतसर और तरनतारन में सबसे ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं। अमृतसर में 60 और तरनतारन में 36 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा फिरोजपुर और गुरदासपुर में पांच-पांच, पटियाला में तीन, मोगा और संगरूर में दो-दो तथा फरीदकोट, फाजिल्का, होशियारपुर, नवांशहर और मोहाली में एक-एक मामला सामने आया है।
जुर्माने से लेकर एफआइआर तक कार्रवाई
पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से केवल जागरूकता पर ही निर्भर नहीं किया जा रहा, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में दर्ज 118 मामलों के संबंध में कुल 2.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसमें से 1.15 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है। इसके अलावा 14 एफआइआर दर्ज की गई हैं और 21 मामलों में संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है।
