250 महिलाओं को रोजगार; 130 करोड़ का टर्नओवर, लुधियाना की मिनी ने ऐसे बदली सैकड़ों परिवारों की किस्मत
लुधियाना की संदीप मिनी रियात महिलाओं को रोजगार और प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना रही हैं, जिससे उनके परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।

संदीप मिनी रियात(बाएं), फैक्ट्री में प्रशिक्षण शिविर के दौरान उपस्थित महिला कर्मचारी (दाएं)।
HighLights
संदीप मिनी रियात 250 से अधिक महिलाओं को रोजगार प्रदान कर रही हैं
महिलाओं को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत हैं
CSR के तहत विधवाओं और गरीब बच्चों की शिक्षा में सहयोग
मुनीश शर्मा, लुधियाना। किसी महिला को रोजगार देना केवल उसे आमदनी का साधन उपलब्ध करवाना नहीं, बल्कि उसके परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और गरीबी से बाहर निकलने का अवसर देना भी है।
लुधियाना की संदीप मिनी रियात इसी सोच के साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं। उनका उद्देश्य महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने के साथ उन्हें हुनरमंद बनाना, बेहतर कार्यस्थल देना और इस योग्य बनाना है कि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। उनकी फैक्ट्री में करीब 250 महिलाएं काम करती हैं, जबकि 100 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
मिनी रियात का मानना है कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए केवल अवसर देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसा माहौल भी मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी झिझक के काम कर सकें और अपनी क्षमताओं को पहचान सकें। इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी फैक्ट्री में करीब 35 प्रतिशत रोजगार महिलाओं को दिया है।

संदीप मिनी रियात। सौ. स्वयं
प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को काम सीखने और औद्योगिक क्षेत्र में अपनी जगह बनाने का अवसर मिलता है। नियमित आय होने से वे घर की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों की शिक्षा और परिवार के बेहतर भविष्य में भी योगदान दे सकती हैं।
महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की उनकी सोच के पीछे संघर्ष का अपना अनुभव भी है। जब उनके पिता की आटो पार्ट्स फैक्ट्री आर्थिक संकट से जूझ रही थी और कर्ज के दबाव में कारोबार बंद होने की नौबत आ गई थी, तब उन्होंने इसकी जिम्मेदारी संभाली।

फैक्ट्री में प्रशिक्षण शिविर के दौरान उपस्थित महिला कर्मचारी। सौ. प्रबंधन
मेहनत और सूझबूझ से कारोबार को संभालकर उन्होंने इसे करीब 130 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर तक पहुंचाया। इस सफर ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि कठिन परिस्थितियों से निकलने के लिए हुनर, अवसर और आत्मविश्वास कितने जरूरी हैं।
महिलाओं को रोजगार देने के साथ संदीप मिनी रियात सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में भी योगदान दे रही हैं। कंपनी के कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) फंड से वह विधवा महिलाओं के उत्थान और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत हैं। गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करवाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि आर्थिक तंगी उनके भविष्य की राह में बाधा न बने।
महिला की आत्मनिर्भरता से मजबूत होता है परिवार
मिनी रियात कहती हैं कि जब किसी महिला के पास नियमित आय का साधन होता है, तो उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। वह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर पाती है।

फैक्ट्री में मशीन पर काम करती महिला कर्मचारी। सौ. प्रबंधन
आर्थिक मजबूती से परिवार की स्थिति सुधरने के साथ महिला का आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ती है। उनके अनुसार, आत्मनिर्भरता का वास्तविक अर्थ केवल खुद के पैरों पर खड़ा होना नहीं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर देना है।
महिलाएं बोलीं- ट्रेनिंग से मिली मदद
कंपनी में जब आई तो कुछ नहीं आता था। इसके बाद यहीं पर ट्रेनिंग मिली और आज यहीं काम करके घर चलाने में परिवार का सहयोग कर रही हूं। इसमें कंपनी ने अहम योगदान दिया है। -संगीता देवी
संगीता देवी। जागरण
हर किसी में टैलेंट छिपा रहता है, लेकिन इसकी कदर करने वाले लोग कम होते है। हमारी एमडी ने हमारे भविष्य को बेहतर करने के साथ साथ मिसाल पेश की है कि जीवन में कोई काम कठिन नहीं और दूसरों के लिए भी काम करना जीवन का उदेश्य होना चाहिए। -राधा
राधा। जागरण


