Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    254 साल की हुई शाही शहर की विरासत

    By JagranEdited By:
    Updated: Sun, 11 Feb 2018 08:20 PM (IST)

    पटियाला के संस्थापक बाबा आला ¨सह यानी 'पट्टी वाला' के नाम वाला शहर पटियाला की विरासत आज सोमवार को 254 वर्ष की हो गई है । 12 फरवरी 1764 में पटियाला के किला मुबारक की स्थापना राजा आला ¨सह ने की थी और वे रियासत के पहले राजा थे, जबकि पटियाला रियासत के महाराजा यादविन्दर ¨सह अन्तिम शासक बने।

    254 साल की हुई शाही शहर की विरासत

    सुरेश कामरा, पटियाला

    पटियाला के संस्थापक बाबा आला ¨सह यानी 'पट्टी वाला' के नाम वाला शहर पटियाला की विरासत आज सोमवार को 254 वर्ष की हो गई है । 12 फरवरी 1764 में पटियाला के किला मुबारक की स्थापना राजा आला ¨सह ने की थी और वे रियासत के पहले राजा थे, जबकि पटियाला रियासत के महाराजा यादविन्दर ¨सह अन्तिम शासक बने। भले किला मुबारक सहित ऐतिहासिक इमारत शीश महल की हालत काफी खस्ता हो गई है, लेकिन फिर भी किला मुबारक के उपरी हिस्से में आज भी बाबा वाला की ज्योति स्वरूप धूणा जलना बरकरार है। बात करें अगर दोनों इमारतों की तो किला मुबारक व शीश महल पब्लिक के लिए बंद है। आजकल शीश महल में हेरिटेज मेले की तैयारी चल रही है, जिसके तहत पुरातत्व विभाग ने शीश महल में रखी 6 तोपें ठीक करवाई हैं।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    मिट्टी हो रही शाही विरासत

    पटियाला शहर में स्थित किला मुबारक, शीश महल, शाहीसमाधां और बारांदरी शहर की पहचान हैं । नानकशाही ईट व सफेद पत्थर से बने यह किला 254 साल पुराना हो गया है । किला अंदरून, रणवास, जलाओखाना, सरदखान, लस्सी ़खाना और दरबार हाल के साथ हथियारों की म्यूजियम गैलरी आखिरी सास गिन रहा है । किला मुबारक के कई हिस्से खस्ताहाल होकर गिर चुके हैं । शीशे की कलाकारी के साथ बनाया गया शीशमहल बीते कई सालों से मरम्मत के नाम पर बंद पड़ा है। यहां आने वाले टूरिस्ट बाहर की इमारत देखकर ही लौट जाते हैं ।

    शाही परिवार का इतिहास

    पटियाला के संस्थापक बाबा आला ¨सह ने 1691 से लेकर 1765 तक जीवित रहे और पटियाला रियासत के पहले शासक बने । बाबा आला ¨सह के तीन पुत्र लाल ¨सह, सरदूल और भूमण ¨सह का बाबा आला ¨सह के शासनकाल में ही देहांत हो गया था। सरदूल ¨सह के लड़के और बाबा आला ¨सह के पोते अमर ¨सह को रियासत की बागडोर सौंपी गई । राजा अमर ¨सह ने सिर्फ 13 साल की उम्र में 1782 तक गद्दी संभाली । इसके बाद राजा साहिब ¨सह ने सिर्फ सात साल की उम्र में गद्दी संभाली और 1813 तक राज किया । महाराजा कर्म ¨सह ने 1813 से 1845, महाराजा नरेंद्र ¨सह ने 1845 से 1865, महाराजा महेंद्र ¨सह ने 1865 से 1876, महाराजा रा¨जदर ¨सह ने 1876 से 1900, महाराजा भूपेंद्र ¨सह ने 1900 से 1938 और सबसे अंत में महाराजा याद¨वदर ¨सह ने 1938 से लेकर 1948 तक शाही रियासत पर राज किया ।

    यूजर सर्टिफिकेट देने पर मिलेगी अगली किस्त : माल¨वदर ¨सह

    मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर ¨सह के भाई और शाही परिवार के साथ संबधित राजा माल¨वदर ¨सह का कहना है कि बाबा आला ¨सह जी ने 1756 में कच्ची पट्टी बनाई थी और बार में 1764 में किला मुबारक की स्थापना की गई थी। मौजूदा समय में हालत खराब के संबंध में उन्होंने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार ने केंद्र से मिले फंड का उक्त इमारतों की मरम्मत पर खर्च किया है, लेकिन उसकी यूज सर्टिफिकेट केंद्र सरकार को नहीं दिया है । सर्टिफिकेट केंद्र सरकार को देने के बाद ही सरकारी मरम्मत के लिए अगली किस्त जारी करेगी। राजा माल¨वदर ¨सह ने कहा कि कैप्टन अम¨रदर ¨सह के नेतृत्व में विरासत को संभालने के लिए फिर प्रयास शुरू हुए हैं। इसके तहत सरकार विरासती मेला लगाने जा रही है। इसके अलावा भविष्य में ऐतिहासिक इमारतों को संभालने के काम जारी रहेंगे ।