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    Farmers Protest: शंभू बॉर्डर पर कम हो रही आंदोलनकारियों की संख्या, हटाई गई भारी मशीनें; अब किसानों को सताने लगी चिंता

    Farmers Protest किसान आंदोलन का असर धीरे-धीरे कम होने लगा है। शंभू बॉर्डर से बुधवार की रात को किसानों का शुरू हुआ पलायन शुक्रवार को भी जारी था। जो किसान अब भी वहां पर डटे हुए हैं वे अपने नेताओं की बेरुखी से मायूस हैं। शंभू सीमा पर अब किसान खुद को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। किसानों को अब चिंता सताने लगी है।

    By Jagran News Edited By: Himani Sharma Updated: Fri, 23 Feb 2024 09:03 PM (IST)
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    शंभू बॉर्डर पर कम हो रही आंदोलनकारियों की संख्या (फाइल फोटो)

    गुरप्रेम लहरी, पटियाला। दिल्ली कूच के लिए हरियाणा से लगती पटियाला जिले की शंभू और संगरूर जिले की खनौरी सीमा पर बुधवार को प्रदर्शनकारी किसानों और हरियाणा पुलिस के बीच हुई तनातनी के बाद वहां के हालात लगातार बदलते जा रहे हैं। शंभू बॉर्डर से बुधवार की रात को किसानों का शुरू हुआ पलायन शुक्रवार को भी जारी था। जो किसान अब भी वहां पर डटे हुए हैं, वे अपने नेताओं की बेरुखी से मायूस हैं।

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    भारी मशीनों और मिट्टी से भरे ट्रालों को हटाया जा रहा

    किसानों के पलायन के साथ ही वहां से हरियाणा सीमा में जबरन दाखिल होने के लिए मंगवाई गईं भारी मशीनों व मिट्टी से भरे ट्रालों को हटाया जा रहा है। उधर, शंभू सीमा पर अब किसान खुद को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। उनका कहना है कि न तो उन्हें अगली किसी रणनीति के बारे में बताया जा रहा है और न ही कोई नेता उनके बीच बैठ रहा है।

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    पसोपेश में किसान

    दोपहर को मात्र कुछ समय के लिए पहुंचे किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के महासचिव सरवन सिंह पंढेर भी पटियाला में बैठक की बात कह कर निकल गए। ऐसे में किसान पसोपेश में हैं कि वे क्या करें। उनके अनुसार हम आगे बढ़ नहीं सकते और अगर खाली हाथ लौटे तो अपने गांव व शहर के लोगों को क्या जवाब देंगे।

    किसानों की संख्‍या केवल 400

    शंभू सीमा पर किसानों में पाई जा रही मायूसी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि किसान वहां लगाए मंच पर भी इक्का-दुक्का इकट्ठा हो रहे हैं और ज्यादातर समय सड़क किनारे या फिर अपनी ट्रालियों में बिता रहे हैं।

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    प्रदर्शनस्थल पर बने मंच पर भी किसानों की संख्या महज 400 के करीब ही रह गई है। इनमें युवाओं और महिलाओं की संख्या बहुत कम है। वहां मौजूद बुजुर्ग किसानों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वे दिल्ली के लिए कूच नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, पीछे हटना भी मुश्किल है।