पिछले चुनाव में सुपर हीरो रही कांग्रेस का नहीं खुला खाता
जिले में इस बार कांग्रेस का सुपड़ा साफ हो गया। कांग्रेस पार्टी को एक भी सीट जिले से नही मिली जबकि वर्ष 2017 में कांग्रेस के ने जिले से दो सीटें जीती थी
जागरण संवाददाता, नवांशहर
जिले में इस बार कांग्रेस का सुपड़ा साफ हो गया। कांग्रेस पार्टी को एक भी सीट जिले से नही मिली जबकि वर्ष 2017 में कांग्रेस के ने जिले से दो सीटें जीती थी, लेकिन इस बार पिछले चुनाव में दो सीटें जीत कर सुपर हीरो रही कांग्रेस पार्टी इस बार अपना खाता तक नहीं खोल सकी।
वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में नवांशहर से विधायक अंगद सिंह व बलाचौर से विधायक चौधरी दर्शन लाल मंगुपुर विजेता रहे थे। इस बार प्रदेश सरकार की एंटीकंबेंसी का खमियाजा जहां कांग्रेस के उम्मदीवारों को भुगतना पड़ा वहीं नवांशहर में अंगद सिंह के आजाद चुनाव लड़ने के कारण कांग्रेस का खेल बिगड़ गया। कांग्रेस के उम्मीदवार सतवीर सिंह पल्ली झिक्की को 6952 वोट मिले। जबकि अंगद सिंह को 31342 वोट मिले वो दूसरे नंबर पर आने वाले आप के ललित मोहन पाठक से मात्र 318 वोटों से पीछे रहे। कांग्रेस हाईकमान की ओर से अंगद सिंह का आखिरी समय में टिकट काट दिया गया था। जिस कारण अंगद ने अपने समर्थकों के कहने पर नवांशहर से आजाद चुनाव लड़ा था।
पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में हुए मतदान में 128619 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। चुनाव में कांग्रेस के अंगद सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी अकाली दल के जरनैल सिंह वाहद को 3323 मतों से हराया। विजयी उम्मीदवार को 38197 व निकटतम प्रतिद्वंदी को 34874 मत प्राप्त हुए। वहीं कहा यह भी जा रहा है कि अगर सतवीर सिंह पल्लीझिक्की ने 6952 वोटें अंगद की ही काटी है। अगर यह वोट अंगद को पड़ती तो वो यह चुनाव जीत भी सकते थे।
वहीं इस बार बलाचौर से विधायक चौधरी दर्शन लाल को वर्ष 2017 के मुकाबले काफी कम वोट मिले हैं। वर्ष 2017 में दर्शन लाल को 49558 वोट मिले थे, जबकि इस बार 31 हजार 47 वोट ही मिले। उनके 18 हजार वोटों का घाटा उठाना पड़ा है। दर्शन लाल के हारने के कई कारण है। पहला कारण रहा कि जीतने के बाद उन्होंने बलाचौर क्षेत्र के कई कांग्रेस के नेताओं से भी दूरी बना ली व उनको पांच वर्ष अपने साथ लेकर नहीं चले। दूसरा कारण रहा कि क्षेत्र के महत्वपूर्ण पदों को उन्होंने अपने रिश्तेदारों को बैठाया, जिसकी नाराजगी कांग्रेस के कई नेताओं में थी। हालांकि चुनावों से पहले नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश की गई पर वो इसमें कामयाब नही हो पाए।
चरणजीत चन्नी को सीएम फेस घोषित होने पर यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि बसपा का वोट बैंक कांग्रेस की ओर ट्रांसफर होगा पर ऐसा भी नहीं हुआ।
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