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    फोटो--) शिव व जीव के मिलन का प्रतीक है पर्व : शुभ्रा भारती

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    Updated: Sun, 22 Feb 2015 05:41 PM (IST)

    जागरण संवाददाता, नवांशहर : श्री गोमती नाथ मंदिर में रविवार को दिव्या ज्योति जागृति संस्थान की ओर से

    जागरण संवाददाता, नवांशहर : श्री गोमती नाथ मंदिर में रविवार को दिव्या ज्योति जागृति संस्थान की ओर से महाशिवरात्रि का पर्व मनाया गया।

    इस दौरान प्रवचन करती हुई शुभ्रा भारती ने कहा कि महाशिवरात्रि का पर्व हमें हर वर्ष आंतरिक पूजन की प्रेरणा देने आता है। इसका अमावस्या से एक रात पूर्व निश्चित होना कोई साधारण संयोग नहीं है। अमावस्या का संधि विच्छेद अमा+वस्या अर्थात एक अवस्थान वास करना है। इस अंधकारमय रात्रि की यह विशेषता है कि इसमें सूर्य और चंद्र एक दूसरे में वास करते हैं। यह अत: स्थित शिव और जीव के मिलन का प्रतीक है। शिवरात्रि संकेत देती है कि हम भी अपने भीतर शिवत्व में वास करें।

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    महाशिवरात्रि की रात्रि तो हमें सदा के लिए कारणरूप शिवत्व में अंतर्लीन होने की प्रेरणा देती है, इसलिए इस पर्व को आप महज बेलपत्र, भाग, धतूरा आदि बाहरी साधनों में रचा व्यवहार न समझें। संतों महापुरुषों के देश में, जहां पहले अमृत बरसा करता था, आज जहर बिक रहा है। आज का युवा नशे में धुत होकर अपने पथ से भटक चुका है। उसके शरीर का अणु-अणु विषैला हो चुका है। आज का युवा वर्ग हमेशा तनाव और नकारात्मक स्थितियों में घिरा रहता है। साध्वी जी ने कहा कि नशे के चंगुल से समाज खासकर युवा वर्ग को बाहर लाने के लिए अकेली शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि धर्म व अध्यात्म से ही इस कहर को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति समझ सकता है कि भगवान शिव के रूप को जिसका अमोघ सूत्र है ब्रह्मज्ञान। अंत में कार्यक्रम में आए सभी युवाओं ने कभी नशा न करने की और समाज को नशा मुक्त बनाने की शपथ ली।